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Published on Nov 10, 13 |     Story by |     Total Views : 26,944 views

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महिलाएं जानें अपने अधिकार : घरेलू हिंसा अधिनियम

page-24हाल ही में अभिनेता ओम पुरी घरेलू हिंसा के मामले में अदालत के चक्कर काट रहे हैं. दरअसल उनकी पत्नी ने इस अभिनेता पर उत्पीडऩ का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की थी. वैसे भी हम आए दिन समाज में स्त्री जाति पर होने वाले अत्याचारों के वाकए टीवी चैनलों से लेकर अखबारों में हम पढ़ते ही रहते हैं. दिल्ली स्थित एक सामाजिक संस्था  द्वारा कराए गए अध्ययन के अनुसार भारत में लगभग पांच करोड़ महिलाओं को अपने घर में ही हिंसा का सामना करना पड़ता है. इनमें से मात्र 0.1 प्रतिशत ही हिंसा के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने आगे आती हैं. आश्चर्य तो इस बात का है कि भारत में आज भी ज्यादातर महिलाएं इस बात से वाकिफ नहीं हैं कि उन्हें घरेलू हिंसा से बचाने के लिए सरकार ने घरेलू हिंसा अधिनियम बनाया गया है. यही वजह है कि इस अधिकार के बारे में जानकारी न होने के चलते पीडि़ताओं की संख्या में इजाफा हो रहा है. आइए जानते हैं कि क्या है घरेलू हिंसा कानून.

  •  क्या है घरेलू हिंसा अधिनियम?

भारत में जो महिलाएं कुटुंब में रहती हैं तथा जिनके प्रति हिंसा होती है उनकी सुरक्षा तथा संरक्षण की गारंटी संविधान के द्वारा प्रदत्त है फिर भी संविधान द्वारा गारंटीयुक्त अधिकारों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से गारंटी को सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2005 में भारतीय संसद ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 पारित किया. इस अधिनियम को 13 सितंबर 2005 के दिन राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई. भारत के राजपत्र में प्रकाशन के पश्चात 14 सितंबर, 2005 से यह अधिनियम प्रभावी हो गया.

यह अधिनियम महिला बाल विकास द्वारा ही संचालित किया जाता है. शहर में महिला बाल विकास द्वारा जोन के अनुसार आठ संरक्षण अधिकारी नियुक्त किए गए हैं. जो घरेलू हिंसा से पीडि़त महिलाओं की शिकायत सुनते हैं और पूरी जांच पड़ताल करने के बाद प्रकरण को न्यायालय भेजा जाता है.

कानून ऐसी महिलाओं के लिए है जो कुटुंब के भीतर होने वाली किसी किस्म की हिंसा से पीडि़त हैं. इसमें अपशब्द कहे जाने, किसी प्रकार की रोक-टोक करने और मारपीट करना आदि प्रताडऩा के प्रकार शामिल हैं. इस अधिनियम के अंतर्गत महिलाओं के हर रूप मां, भाभी, बहन, पत्नी व महिलाओं के हर रूप और किशोरियों से संबंधित प्रकरणों को शामिल किया जाता है. घरेलू हिंसा अधिनियम के अंतर्गत प्रताडि़त महिला किसी भी वयस्क पुरुष को अभियोजित कर सकती है अर्थात उसके विरुद्ध प्रकरण दर्ज करा सकती है.

  • घरेलू हिंसा की परिभाषा

परिवार का कोई भी पुरुष सदस्य अगर महिला को मारता है, उसके साथ अभद्र भाषा में बात करता है या उसे किसी भी चीज के लिए विवश करता है तो वह महिला घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उसके खिलाफ मामला दर्ज करा सकती है. व्यापक तौर पर घरेलू हिंसा के निम्नलिखित प्रकार हैं-

१. शारिरिक हिंसा

मारपीट करना, धकेलना, ठोकर मारना, लात मारना मुक्का मारना, किसी अन्यर रीति से शारीरिक पीड़ा या क्षति पहुंचाना.

२. लैंगिक हिंसा

बलात्कार करना, अश्लील साहित्य या अश्लीाल तस्वीरों को देखने के लिए विवश करना, महिला के साथ दुव्र्यवहार करना, अपमानित करना, महिला की पारिवारिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को आहत करना.

३. मौखिक और भावनात्मक हिंसा

अपमान करना, चरित्र पर दोषारोपण करना, पुत्र न होने पर अपमानित करना, दहेज इत्यादि न लाने पर अपमानित करना, नौकरी न करने या उसे छोड़ देने के लिए विवश करना, विवाह न करने की इच्छा के विरुद्ध विवाह के लिए जबर्दस्ती करना, उसकी पसंद के व्यक्ति से विवाह न करने देना, किसी विशेष व्यक्ति से विवाह करने के लिए विवश करना, आत्महत्या करने की धमकी देना, कोई अन्य मौखिक दुव्र्यवहार करना.

४. आर्थिक हिंसा

बच्चों की पढ़ाई और उनके संरक्षण के लिए धन उपलब्ध न कराना, बच्चों के लिए खाना, कपड़ा, दवाइयां उपलब्ध न कराना, रोजगार चलाने से रोकना या उसमें रुकावट पैदा करना, वेतन इत्यादि से प्राप्त आय को ले लेना, घर से निकलने के लिए विवश करना, निर्धारित वेतन या पारिश्रमिक न देना.

  •  कैसे मिले राहत 

इस अधिनियम के अंतर्गत अगर कोई महिला घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराती है तो जिला मजिस्ट्रेट आरोपी को क्षति-पूर्ति करने का आदेश और सांझा घर के अंतर्गत निवास उपलब्ध कराने के आदेश जारी कर सकता है. अधिनियम की धारा 33 के अंतर्गत अगर आरोपी दिए गए आदेशों का पालन नहीं करता तो को एक वर्ष तक का दंड एवं बीस हजार तक का जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है.

इस कानून के तहत घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिए जज या अदालत तीन दिन के अंदर-अंदर बचावकारी आदेश एवं गिरफ्तारी के वारंट जारी करेंगे. घरेलू हिंसा से पीडि़त कोई भी महिला अदालत में जज के समक्ष स्वयं अथवा वकील, सेवा प्रदान करने वाली संस्था या संरक्षण अधिकारी की मदद से अपनी सुरक्षा के लिए बचावकारी आदेश ले सकती है. पीडि़त महिला के अलावा कोई भी पड़ोसी, परिवार का सदस्य, संस्थाएं या फिर खुद भी महिला की सहमति से अपने क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में शिकायत दर्ज कराकर बचावकारी आदेश हासिल किया जा सकता है. घरेलू घटना रपट (डोमेस्ट्रिक इंसिडेंट रिपोर्ट) एक दफ्तरी प्रारूप है जिसमें घरेलू हिंसा की रिपोर्ट दर्ज करायी जाती है. इस कानून के तहत मिलने वाली राहत में बचावकारी आदेश, काउंसलिंग, क्षतिपूर्ति, भरण पोषण, बच्चों का संरक्षण और जरूरत पड़े तो रहने की जगह भी दी जाती है. अगर पीडि़त की रिपोर्ट से जज को ऐसा लगे कि पीडि़त को हिंसा कर्ता से आगे भी खतरा हो सकता है तो जज हिंसा कर्ता को घर से बाहर रहने के आदेश दे सकते हैं. इस कानून के अंतर्गत नियुक्त प्रोटेक्शन ऑफिसर (संरक्षण अधिकारी) की जिम्मेदारी यह है कि पीडि़त महिला को आवेदन लिखने में मदद करना, आवेदन जज तक पहुंचाना एवं कोर्ट से राहत दिलाना.

  •  पीडि़ता किससे संपर्क करे

पीडि़त महिला घरेलू हिंसा से संबंधित अधिकारी जैसे उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास, बाल विकास परियोजना अधिकारी आदि से शिकायत दर्ज करा सकती है. किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संगठन से संपर्क किया जा सकता है जो महिलाओं और बच्चों के लिए काम करती हो. पुलिस स्टेशन से संपर्क कर सकती है. किसी भी सहयोगी के माध्यम से अथवा स्वयं जिला न्यायालय में प्रार्थना पत्र डाल सकती है.

 

दहेज मृत्यु                                        304                         आजीवन कारावास

महिला की शालीनता भंग करने की मंशा से हिंसा या जबरदस्ती करना.                 54                           02 साल

अपहरण, भगाना या महिला को शादी के लिये विवश करना.               366                         10 साल

नाबालिक लडक़ी को कब्जे में रखना                          366                         10 साल

बलात्कार (सरकारी कर्मचारी द्वारा या सामूहिक बलात्कार अधिक गंभीर माने जाते हैं)      376                         02-10 वर्ष की उम्र कैद

पहली पत्नी के जीवित होते हुए दूसरी शादी करना                     494                         07 साल

व्यभिचार                                               497                         05 साल

महिला की शालीनता को अपमानित करने की मंशा से अपशब्द या अश्लील हरकतें करना   509                         01 साल

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10 Responses to महिलाएं जानें अपने अधिकार : घरेलू हिंसा अधिनियम

  1. Amit yadav says:

    Agar yahi sab kisi purush ke sath ho rha ho to kya hoga jankari dijiye

  2. Amit yadav says:

    Agar gharelu hinsha kisi purush ke sath ho rha ho to kya hoga jankari dijiyega.

  3. Brijmohan says:

    Ye sab kisi purush k sath ho rha ho to uska ek hi samadhan h chupchap baitho
    Kyoki bhartiy savidhan sirf mahilao k sath h
    Purusho k sath ho rahi andhekhi ko dekhte hue aisa karne wali mahilao k sath ek hi kaam ho
    Nirbhya kand

  4. mayra ali says:

    Meri shadi k 15 Dino baad se hi mujhe pareshan kiya ja rha h .mujhe character less sabit krna k liye wo log har had tak gir chuke h .mujhe job chorne k liye bhi pressure kr rhe h.mere sath mere sasural aur dewar mujhe badtamizi kr rhe h aur bht pareshan kr rhe h .plz bataiye me kya kru

  5. mohd naeem ansari says:

    i m facing case of gharelu hinsa from my wife ,, we are divorced through muslim law .. but after one year she maintain case of gharelu hinsa and dahej pratadhana (498 A) ..

  6. saba says:

    apke ghar ki mahilao k sath nirbhya kand ho to?

  7. suman lata says:

    Mere pati ek ICL nam ke sangthan se jude hai abhi munhe hal mein pata chala ki unka affair ek bees sal ki ladki se hai aur mere pati pachas sal ke hai wo ladki bhi ICL mein hai mere pati ke parents unka hi sath de rahe hai sath hi mere pati ka ek dost bhi unka bahut sath deta hai mere pati govt employees hai what i am do

  8. मुक्ति says:

    महिलायों से ज्यादा पुरुष पिडीत है आज के समय में क्या करे पुरुष समझ नही आ रहा है

  9. Avani shah says:

    Agar Ghar main dusari mahila k taraf se yani saas ki taraf se devrani ko accha rakh ke jethani ko all types of mentally​ tourcher Kiya jata ho to Kya kare?

  10. minakshi says:

    agar mahila ne lovr merige ki ho or uske sat durvyvharr ho raha to us mahila ke sat kya nyay hoga or mahila ke ghar balo ka sat na ho to mahila ke sat roj. lada
    i hoti ho

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