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Published on Jan 29, 16 |     Story by |     Total Views : 682 views

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बिगड़ते पर्यावरण को हमें ही बचाना होगा

हर व्यक्ति के जीवन में इस प्रकार की तकनीकी उन्नति दिन-ब-दिन पृथ्वी पर जीवन के संभावनाओं को खतरे में डाल रही है क्योंकि हमारा पर्यावरण धीरे-धीरे नष्ट हो रहा है. ऐसा लगता है यह एक दिन जीवन के लिए बहुत हानिकारक साबित होगा. क्योंकि प्राकृतिक हवा, मिट्टी और पानी प्रदूषित होते जा रहे हैं. हानिकारक रासायनों के उपयोग द्वारा कृत्रिम रूप से तैयार उर्वरक जो मिट्टी को खराब कर रहे हैं परोक्ष रूप से हमारे दैनिक खाना खाने के माध्यम से हमारे शरीर में एकत्र हो रहे हैं। औद्योगिक कंपनियों से उत्पन्न हानिकारक धुंआ दैनिक आधार पर प्राकृतिक हवा को प्रदूषित कर रहा है जो काफी हद तक हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं क्योकि हम हर पल साँस लेते हैं.


bigadte paryawaran ko bachana haiसभी प्राकृतिक चीजें जो पृथ्वी पर जीवन संभव बनाती हंै पर्यावरण के तहत आती हैं जैसे जल, वायु, सूर्य का प्रकाश, भूमि, अग्नि, वन, पशु, पौधे इत्यादि. ऐसा माना जाता है कि केवल पृथ्वी ही पूरे ब्रह्माण्ड में एक मात्र ऐसा गृह है जहां जीवन के अस्तित्व के लिए आवश्यक पर्यावरण है. पर्यावरण के बिना यहाँ हम जीवन का अनुमान नहीं लगा सकते इसीलिए हमें भविष्य में जीवन की संभावना सुनिश्चित करने के लिए अपने पर्यावरण को स्वस्थ्य और सुरक्षित रखना चाहिए. यह पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है. हर किसी को आगे आना चाहिए और पर्यावरण की सुरक्षा के अभियान में शामिल होना चाहिए।

प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए पर्यावरण और जीवित चीजों के बीच नियमित रूप से विभिन्न चक्र घटित होते रहते हैं। हालांकि, अगर किसी भी कारण से ये चक्र बिगड़ जाते हैं तो प्रकृति का भी संतुलन बिगड़ जाता है जो कि अंतत: मानव जीवन को प्रभावित करता है। हमारा पर्यावरण हजारंों वर्षों से हमें और अन्य प्रकार के जीवों को धरती पर बढऩे, विकसित होने और पनपने में मदद कर रहा है। मनुष्य पृथ्वी पर प्रकृति द्वारा बनाए गए सबसे बुद्धिमान प्राणी के रूप में माना जाता है इसीलिए उनमे ब्रह्मांड के बारे में पता करने की उत्सुकता बहुत ज्यादा है जोकि उन्हें तकनीकी उन्नति की दिशा में ले जाता है।

हर व्यक्ति के जीवन में इस प्रकार की तकनीकी उन्नति दिन-ब-दिन पृथ्वी पर जीवन के संभावनाओं को खतरे में डाल रही है क्योंकि हमारा पर्यावरण धीरे-धीरे नष्ट हो रहा है. ऐसा लगता है यह एक दिन जीवन के लिए बहुत हानिकारक साबित होगा. क्योंकि प्राकृतिक हवा, मिट्टी और पानी प्रदूषित होते जा रहे हैं. हानिकारक रासायनों के उपयोग द्वारा कृत्रिम रूप से तैयार उर्वरक जो मिट्टी को खराब कर रहे हैं परोक्ष रूप से हमारे दैनिक खाना खाने के माध्यम से हमारे शरीर में एकत्र हो रहे हैं। औद्योगिक कंपनियों से उत्पन्न हानिकारक धुंआ दैनिक आधार पर प्राकृतिक हवा को प्रदूषित कर रहा है जो काफी हद तक हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं क्योकि हम हर पल साँस लेते हैं.

इंसान की उन्नत जीवन स्तर के युग में, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, वनों की कटाई, जल प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण, अम्ल वर्षा और तकनीकी प्रगति के माध्यम से मनुष्यों द्वारा किये गए अन्य खतरनाक आपदाओं के रूप में हमारा प्रदूषण काफी हद तक प्रभावित हो रहा है. हम सभी को हमारे प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा के लिए और इसे सामान्य रूप से सुरक्षित रखने के लिए एक साथ शपथ लेनी चाहिए।

इस व्यस्त भीड़ और उन्नत जीवन में हमे दैनिक आधार पर छोटी छोटी बुरी आदतों का ख्याल रखना चाहिए। यह सत्य है कि हर किसी के छोटे से छोटे प्रयास से हम हमारे बिगड़ते पर्यावरण की दिशा में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हमें हमारे स्वार्थ के लिए और हमारी विनाशकारी इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का गलत उपयोग नहीं करना चाहिए। हमेें जीवन को बेहतर बनाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास करना चाहिए लेकिन हमेशा यह सुनिश्चित रहे कि भविष्य में हमारे पर्यावरण को इससे कोई नुकसान न हो। हमें सुनिश्चित होना चाहिए की नई तकनीक हमारे पारिस्थितिकी संतुलन को कभी गड़बड़ न करे.

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