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Archive for the ‘Editorial’ Category

  • जनता के भरोसे पर खरा उतरने की परीक्षा है ये जीत

    on May 19, 17 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    एक बात साफ हो गई कि आम आदमी पार्टी पंजाब, गोवा, दिल्ली में राजौरी गार्डन की हार और अब एमसीडी की हार के बावजूद आत्ममंथन नहीं करना चाहती. उसे लगता है कि ऐसा करना केजरीवाल के करिश्मे का अपमान होगा. इसके बजाए आरोपों के आंदोलन से पैदा हुई ये पार्टी एक बार फिर एक नए आंदोलन पर सवार हो कर देश में ईवीएम के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है. लगभग 10 साल की विरोधी सत्ता को हराकर, भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली के एमसीडी चुनाव में अपनी जीत का परचम लहराया है

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  • ये जीत भाजपा के विजन की है

    on Apr 19, 17 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    पांच राज्यों के चुनाव नतीजों से कई चीजें साफ हुई हैं। बीजेपी की जीत दरअसल एक विजन की जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के सामने भारत के विकास का एक ठोस विजन पेश किया है, जिसे लोगों ने एक बार फिर खुलकर समर्थन दिया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी देश के विकास और जनता की खुशहाली के लिए अपना अलग नजरिया लेकर आए। वे जनता को सपने दिखाने और उसमें उम्मीद जगाने में सफल रहे। यही वजह है कि उन्हें जनता ने देश का नेतृत्व सौंप दिया।

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  • काला धन की अस्पष्ट परिभाषा

    on Dec 11, 16 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    आज हर कोई सरकार की इसके लिए सराहना कर रहा है. तीस सितम्बर की समय सीमा खत्म होने के बाद देश को काला धन धारकों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का इंतजार था, लेकिन ये तो सरकार ने काले धन पर सर्जिकलस्ट्राइक करने जैसा कदम उठा लिया. वो भी बिना किसी शोरगुल और हो-हंगामे के अचानक ही इतना बड़ा ऐलान हो गया, जिससे कि काला धन धारकों को अपने पैसे को ठिकाने लगाने के लिए सोचने को भी वक्त नहीं मिल पाया होगा. साल पहले गुजरात से आने वाले मोरार जी देसाई ने भी यह 1000,

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  • तीन तलाक- कैसे बनेगी बात?

    on Oct 21, 16 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    मुसलमान पुरुष तीन बार तलाक शब्द का उच्चारण करके अपनी शादी समाप्त कर सकते हैं. लेकिन कई मुस्लिम देशों में ये उच्चारण एक ही बार में ना कर के तीन महीने की अवधि में करने का नियम है, ताकि पति को तीसरे और अंतिम बार तलाक के उच्चारण से पहले अपने फैसले पर ठीक से विचार करने का पर्याप्त मौका मिल सके. एक बार में तीन बार तलाक कह दिया और टूट गया रिश्ता? शादी के जिस संबंध को तमाम कसमों और गवाहों के सामने जोड़ा जाता है, उसे तोडऩे के इतने आसान नियम क्या

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  • साहस के साथ जवाब दे

    on Sep 21, 16 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    ALL-RIGHTS-SEPTEMBER-2016

    पाकिस्तान ने जितनी तेजी से संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर के मुद्दे को उठाने की तैयारी की है और सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों से इसके समाधान की कोशिश करने की अपील की है, उससे लगता है कि या तो घाटी में ताज़ा विरोध प्रदर्शन और उड़ी में आतंकी हमला किसी व्यापक योजना का हिस्सा हैं या ये एक-दूसरे से जुडक़र योजना का निर्माण करते जा रहे हैं। कश्मीर के उड़ी क्षेत्र में सैनिक शिविर पर आतंकी हमले ने भारत और पाकिस्तान के लगातार बिगड़ते संबंधों को ज्यादा खतरनाक दिशा में मोड़ दिया है। जहां

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  • जीएसटी की राह में चुनौतियां और भी हैं

    on Aug 14, 16 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    संविधान संशोधन बिल के कानून बनने के बाद सरकार को जीएसटी बिल लाना होगा। जिसमें जीएसटी की बारीकियां शामिल होंगी। इस बिल को तैयार करने में भी खास तौर से राज्यों के स्तर पर राजनैतिक सहमति बनाना काफी मुश्किल होगा। क्योंकि कई मुद्दे ऐसे हैं जिस पर राज्यों के साथ मतभेद लंबे समय से बने हुए हैं। गुजरात में आज जीएसटी बिल पास हो गया। गुजरात जीएसटी पास करने वाला देश का छठां राज्य बन गया है। आज विधानसभा ने सर्वसम्मति से इसे पास कर दिया। लोकसभा और राज्यसभा में जीएसटी बिल पारित हो जाने

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  • इस विस्तार के मायने क्या हैं

    on Jul 13, 16 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    पंजाब में भाजपा अकाली दल के दामन से बंधी हुई है और उसका आधार गैर-सिखों में है, इसलिए बिहार के वासी और दार्जीलिंग के सांसद एसएस अहलूवालिया को मिलने वाला मंत्रिपद उनकी वरिष्ठता और प्रशासनिक तजुर्बे के खाते में ही जाता है। वैसे भी पंजाब के चुनाव की फिक्र करना अकाली दल का सिरदर्द ज्यादा है। विजय गोयल पिछले कुछ महीनों में दिल्ली भाजपा के सबसे संघर्षोन्मुख नेता रहे हैं। करीबन छब्बीस महीने पहले नरेन्द्र मोदी ने जो टीम बनाई थी, उसके कामकाज से वे खुद खास संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने किसी बड़े मंत्री

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  • ताकि कल तक रहे जल…

    on Jun 18, 16 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    देश के विशाल स्वरूप और मौसमी बरसात में विभिन्न कारणों से हो रही विभिन्नताओं को देखते हुए भारत के किसी भी भाग को सूखे की संभावना से अलग नहीं किया जा सकता। भारत के सूखा प्रभावित राज्यों में आंध्रप्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तामिलनाडु शामिल हैं। आपदा प्रबंधन के उचित उपायों से पिछले कुछ वर्षों में सिंचाई सुविधाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इसी तरह जंगलों की स्थिति में भी सुधार की स्थिति दिखती है। कृतिक आपदाओं का सीधा संबंध पर्यावरण से है। लंबे समय तक जल की कमी को सूखे

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  • मेक इन इंडिया में अपार संभावनाएं

    on Apr 18, 16 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    भारत में अभी भी सालाना 2 करोड़ 20 लाख व्यावसायिक दक्ष लोगों की जरूरत होती है जबकि इसके विपरीत हमारी सालाना आपूर्ति मात्र 43 लाख है 20 प्रतिशत से भी कम. यानी भारत के बाजार में भी वर्तमान समय में अपार संभावनाएं हैं. पढ़े-लिखे हुनरमंद नौजवानों के लिए, यानी हमें अभी भी अपना फोकस भारतीय बाजारों पर करना होगा, जहां आज भी अपार संभावनाएं हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा शुरू की गई योजना मेक इन इंडिया को लगातार सफलता के शिखर पर पहुंचते हुए देखा जा रहा है. इस योजना के तहत ही एक

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  • एनपीए : भारतीय अर्थव्यवस्था की दुश्मन

    on Mar 30, 16 • in Editorial, Magazine Issues • with No Comments

    NPA bhartiya arthbewstha

    रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन कॉरपोरेट कर्ज के ऊंचे स्तर और उसे चुकाने संबंधी उद्योग जगत की क्षमता पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। रघुराम राजन का मानना है कि अधिकतर कंपनियों के मुनाफे में कमी आ रही है, जिससे उन्हें कर्ज की किस्त तथा ब्याज चुकाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती चूक के कारण कारपोरेट जगत के ‘पुनर्गठित’ कर्ज की व्यापकता तथा एनपीए में लगातार इजाफा हो रहा है। रघुराम राजन के मुताबिक उद्योग जगत का करीब बीस प्रतिशत कर्ज डूबने के कगार पर है। कड़े के अनुसार एनपीए

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