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Archive for the ‘RIGHTS’ Category

  • Import of computers, printers be allowed if cartridges allowed to be manufactured and refilled in India: MRP base GST necessary

    on May 27, 17 • in Daily_News, National, RIGHTS, RTI Activist • with No Comments

    Under the ambitious Make-In-India programme, central government should take necessary steps to impose some guidelines for import of computers and printers. Presently printers are sold at comparatively throw-away prices as compared with abnormally high cost of ink-cartridges in these printers. Sizes and shapes of cartridges of all laser printers are almost same, but are with different specifications so that each printer may require different type of cartridge. Chips are there in cartridges to prevent much-much economical re-filling. Warranty-conditions of printers are terminated on use of re-filled cartridges. India being a strong consumer-base, is in a

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  • Child Rights

    on Apr 19, 17 • in Magazine Issues, Right to Education, RIGHTS • with No Comments

    child rights

    In the history of human rights, the rights of children are the most ratified. The United Nations Convention on the Rights of the Child (UNCRC) defines Child Rights as the minimum entitlements and freedoms that should be afforded to every citizen below the age of 18 regardless of race, national origin, colour, gender, language, religion, opinions, origin, wealth, birth status, disability, or other characteristics. They are abandoned. They do not get a chance to step in a school. They are left to fend for themselves on the streets. They suffer from many forms of violence

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  • समानता और स्वतंत्रता का अधिकार

    on Jul 13, 16 • in Human Rights, Magazine Issues, RIGHTS • with No Comments

    ghosh ka jawab RTI

    समानता का अधिकार संविधान की प्रमुख गारंटियों में से एक है। यह अनुच्छेद 14-16 में सन्निहित हैं जिसमें सामूहिक रूप से कानून के समक्ष समानता तथा गैर-भेदभाव के सामान्य सिद्धांत शामिल हैं, तथा अनुच्छेद 17-18 जो सामूहिक रूप से सामाजिक समानता के दर्शन को आगे बढ़ाते हैं। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, इसके साथ ही भारत की सीमाओं के अंदर सभी व्यक्तियों को कानून का समान संरक्षण प्रदान करता हैइस में कानून के प्राधिकार की अधीनता सबके लिए समान है, साथ ही समान परिस्थितियों में सबके साथ समान व्यवहार। उत्तरवर्ती

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  • क्या है सूचना का अधिकार

    on Jul 13, 16 • in Human Rights, Magazine Issues, RIGHTS, RTI Activist • with No Comments

    ghosh ka jawab RTI

    भारत एक लोकतान्त्रिक देश है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था में आम आदमी ही देश का असली मालिक होता है। इसलिए मालिक होने के नाते जनता को यह जानने का हक है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनाई गई है। वह क्या, कहां और कैसे कर रही है। इसके साथ ही हर नागरिक इस सरकार को चलाने के लिए टैक्स देता है, इसलिए भी नागरिकों को यह जानने का हक है कि उनका पैसा कहां खर्च किया जा रहा है। जनता के यह जानने का अधिकार ही सूचना का अधिकार है। 1976 में राज नारायण बनाम

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  • जाने सांसद-विधायक का पैसा कहां गया

    on Nov 12, 15 • in Human Rights, Magazine Issues, RIGHTS • with No Comments

    gram sabha ke adhikar

    कोई नेता जब आप से वोट मांगने आता है तो क्या कहता है? वह कहता है कि आप उसे वोट दें ताकि वह आने वाले पांच सालों तक आपकी सेवा करता रहे. मतलब, जनता मालिक और नेता सेवक. लेकिन चुनाव जीतने के बाद क्या होता है? क्या आपको यह पता चलता है कि विधायक जी को स्थानीय क्षेत्र के विकास के लिए जो करोड़ों रुपये सरकार की तरफ़ से मिलते हैं, वो कहां जाते हैं? आपके क्षेत्र के विकास में विधायक फंड का कितना इस्तेमाल हुआ? कहीं उस फंड का बंदरबांट विधायक जी के चमचों

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  • SUPPORT CHILD RIGHTS

    on Sep 7, 15 • in Human Rights, Magazine Issues, RIGHTS • with No Comments

    SUPPORT CHILD RIGHTS

    FREECULTR Express, the fashion e-commerce platform has launchedan online tee store with CRY- Child Rights and You,India’s leading child rights organisation with an aim to give a healthy start to 30,513 children across CRY supported projects in the country. Through this partnership FREECULTR wants to reach out to the disadvantaged children and extend their support to the cause of child rights. The CRY tee store, that will be online for a period of one year,will feature customised tees designed exclusively by CRY on issues of child rights. Customers can now pledge their support towards CRY’s

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  • क्या है बच्चों के अधिकार

    on Jan 4, 15 • in Human Rights, Magazine Issues, RIGHTS • with No Comments

    वह सभी व्यक्ति एक बच्चा है जो 18 वर्ष से कम आयु का है। अभिभावकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के पोषण और विकास कार्य पर ध्यान दें। राज्य बच्चों के अधिकार का सम्मान करेगी और उसे सुनिश्चित कराएगी। प्रतिष्ठा व अभिव्यक्ति मुझे अपने अधिकार के बारे में जानने का अधिकार है। (अनुच्छेद-42) मुझे एक बच्चा होने का अधिकार है। इसके लिए यह बात मायने नहीं रखता कि मैं कौन हूँ, कहाँ रहता हूँ, मेरे माता-पिता क्या करते हैं, मैं कौन सी भाषा बोलता हूँ, मैं किस धर्म का पालन करता हूँ, मैं

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  • बजट यानी विकास का गजट

    on Nov 8, 14 • in Cover Story, Magazine Issues, RIGHTS • with No Comments

    केंद्रीय बजट का इंतजार देश के सभी लोगों को होता है. सभी वर्ग के लोगों को अपने हितों के अनुसार, बजट की घोषणाओं का इंतजार होता है. किसान को  इस बात का इंतजार होता है कि बजट में कृषि के लिए क्या दिया जाएगा, जिससे उनकी जिंदगी प्रभावित होगी, उसी तरह नौकरी पेशा लोगों से लेकर सामान्य व्यवसाय करने वाले लोगों और यहां तक कि बड़े उद्योगपतियों तक को बजट का इंतजार होता है, ताकि उन्हें अपनी आर्थिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए दिशा निर्देश मिल सके.इस बार लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को

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  • रेल बजट

    on Nov 8, 14 • in Cover Story, Magazine Issues, RIGHTS • with No Comments

    इस साल का रेल बजट के कुछ पहलुओं का अनुमान पहले से ही था क्योंकि बजट के कुछ समय पहले हीं रेल किराए में बढ़ोतरी कर दी गई थी, ताकि इस बढ़ोतरी से बजट पेश करने के समय कोई ज्यादा परेशानियों का सामना न करना पड़े. कई वादों, वास्तविकताओं के बीच रेल बजट पेश किया गया. संसाधनों की कमी से जुझ रही भारतीय रेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने में अभी बहुत समय लगेगा, लेकिन उसे स्पीड देने का भरसक प्रयास इस बजट में किया गया है. दस साल के मनमोहक रेल बजटों के बाद

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  • सूचना के अधिकार कानून के बारे में कुछ खास बातें

    on Nov 8, 14 • in Human Rights, Magazine Issues, RIGHTS • with No Comments

    भारत एक लोकतान्त्रिक देश है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था में आम आदमी ही देश का असली मालिक होता है। इसलिए मालिक होने के नाते जनता को यह जानने का हक है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनाई गई है। वह क्या, कहां और कैसे कर रही है। इसके साथ ही हर नागरिक इस सरकार को चलाने के लिए टैक्स देता है, इसलिए भी नागरिकों को यह जानने का हक है कि उनका पैसा कहां खर्च किया जा रहा है। जनता के यह जानने का अधिकार ही सूचना का अधिकार है। 1976 में राज नारायण बनाम

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