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Archive for the ‘Right to Education’ Category

  • Child Rights

    on Apr 19, 17 • in Magazine Issues, Right to Education, RIGHTS • with No Comments

    child rights

    In the history of human rights, the rights of children are the most ratified. The United Nations Convention on the Rights of the Child (UNCRC) defines Child Rights as the minimum entitlements and freedoms that should be afforded to every citizen below the age of 18 regardless of race, national origin, colour, gender, language, religion, opinions, origin, wealth, birth status, disability, or other characteristics. They are abandoned. They do not get a chance to step in a school. They are left to fend for themselves on the streets. They suffer from many forms of violence

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  • निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर….

    on Oct 26, 16 • in Human Rights, Magazine Issues, Right to Education • with No Comments

    right-to-information

    कुछ अरसे पहले पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने यह याचिका तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें आयोग ने कंपनी को मंथन अध्ययन केन्द्र द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। एक हजार करोड़ की लागत वाली एनटीएडीसीएल देश की पहली ऐसी जलप्रदाय परियोजना थी जिसे प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मार्च 2004 में प्रारंभ किया गया था। परियोजना में काफी सारे सार्वजनिक

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  • ग्राम सभा के अधिकार क्या हैं

    on Nov 12, 15 • in Human Rights, Magazine Issues, Right to Education • with 3 Comments

    gram sabha ke adhikar

    ग्राम सभा क्या है? ग्राम सभा पंचायतीराज की आधारभूत इकाई है। यह ग्राम सभा प्रत्येक राजस्व ग्राम या वन ग्राम में उस गांव के वयस्क मतदाताओं को मिलाकर गठित की जाती हैै। यानि गांव का प्रत्येक मतदाता ग्राम सभा का सदस्य होता है। ग्राम सभा किसी एक गांव या पंचायत का चुनाव करने वाले गांवों के समूह की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों से मिलकर बनी संस्था है। ग्राम सभा की संरचना-  ग्राम सभा में राज्य निर्वाचन आयोग (पंचायत एवं स्थानीय निकाय) द्वारा तैयार पंचायत क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज सभी लोग सदस्य होते

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  • इंजीनियरिंग एजूकेशन

    on Jun 17, 14 • in Cover Story, Magazine Issues, Right to Education • with No Comments

    इंजीनियरिंग की पढ़ाई को संचालित करने के लिये साल 2000 में उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय यानी यूपीटीयू की स्थापना हुई य़ह एशिया कासबसे बडा तकनीकी विश्वविद्यालय है इसके अंतर्गत 400 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज और 600 से अधिक मैनेजमेंट कॉलेज हैं य़हां पढ़ाये जाने वाले कोर्सेज में 2 लाख सीटे है अ भी 10-15 साल पहले की ही बात है किसी भी युवा के लिये इंजीनियर बनना एक सपने जैसा होता था देश में इंजीनियरिंग कालेजों की संख्या बहुत कम थी सरकारी कालेजों में सीटे कम होने से इंजीनियर बनने वाले युवाओं के सामने मेरिट रैंक

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  • कब करें आयोग में शिकायत

    on Apr 25, 14 • in Financial Rights, Magazine Issues, Right to Education • with 7 Comments

    कई बार ऐसा होता है कि आपने अपने आरटीआई आवेदन में जो सवाल पूछा है, उसका जवाब आपको ग़लत दे दिया जाता है और आपको पूर्ण विश्वास है कि जो जवाब दिया गया है वह ग़लत, अपूर्ण या भ्रामक है. इसके अलावा, आप किसी सरकारी महकमे में आरटीआई आवेदन जमा करने जाते हैं और पता चलता है कि वहां तो लोक सूचना अधिकारी ही नियुक्त नहीं किया गया है. इस बार हम आपको बताते हैं कि आरटीआई क़ानून के तहत शिक़ायत का क्या अर्थ होता है? शिक़ायत कब, कहां और कैसे दाखि़ल की जाती है

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  • क्या है हमारे मूल अधिकार?

    on Apr 25, 14 • in Fundamental Rights, Magazine Issues, Right to Education, RIGHTS • with 5 Comments

    मौलिक अधिकार संपूर्ण नहीं होते तथा वे सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक उचित प्रतिबंधों के अधीन होते हैं . 1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 1967 के पूर्व निर्णय को रद्द करते हुए निर्णय दिया कि मौलिक अधिकारों में संशोधन किया जा सकता है, यदि इस तरह के किसी संशोधन से संविघान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन होता हो, तो न्यायिक समीक्षा के अधीन …. संविधान के भाग iii  में सन्निहित मौलिक अधिकार, सभी भारतीयों के लिए नागरिक अधिकार सुनिश्चित करते हैं और सरकार को

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  • दिल्ली : सरकारी स्कूलों की बदतर स्थिति को ले कर छात्रों का पीआईएल पोस्टकार्ड

    on Apr 21, 14 • in Human Rights, Magazine Issues, Right to Education • with No Comments

    बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है और स्कूल एवं शिक्षण संस्थाएं उनके भविष्य निर्माण की संस्थाएं हैं. लेकिन, यही संस्थाएं जब शिक्षा की जगह बच्चों से कुछ और काम करवाने लगे या शिक्षक सवाल पूछने पर बच्चों को हतोत्साहित करने लगे और अनुशासन के नाम पर बिना गलती के भी छात्र-छात्राओं को शारीरिक दंड देने लगे, स्कूलों में छात्रों के बैठने के लिए डेस्क न हो, मिड डे मील से कीड़े निकले और स्कूल के चारों ओर गंदगी का माहौल हो एवं पीने के पानी की कोई सुविधा न हो, तो यह अंदाजा

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  • आरटीआइ का जवाब देने के लिए कालेज को चाहिए एक साल

    on Aug 20, 13 • in News, Right to Education, RIGHTS • with No Comments

    मुंबई। सूचना का अधिकार कानून (आरटीआइ) अर्जी का जवाब देने से बचने के लिए नए बहाने खोजे जा रहे हैं। ऐसा ही मामला मुलुंड के एक कॉलेज का है। इस कॉलेज ने मांगी गई सूचना के जवाब में एक साल का समय मांगा और कहा कि इसके लिए दो अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त करने पड़ेंगे, जिसका खर्च सूचना मांगने वाले को उठाना होगा। कंजुरमार्ग (पूर्व) निवासी आरटीआइ कार्यकर्ता रंजीत महंती ने एक दिसंबर, 2012 को विनायक गणेश वाजे केलकर कॉलेज से छात्रों से सिक्योरिटी डिपोजिट और कॉशन मनी के तहत ली जाने वाली राशि का ब्योरा मांगा था।

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  • ASER survey : Right to Education Act may be behind falling school learning

    on Jul 2, 13 • in Right to Education, RIGHTS • with No Comments

    School-level enrolment rates continue to rise, the Right to Education Act (RTE) seems to be helping develop better school infrastructure and there are more toilets for girls in schools — these are the few encouraging findings during 2012 in what otherwise is yet another alarming Annual Status of Education Report (ASER). The ASER findings, published by NGO Pratham, underscore the declining reading levels and learning outcomes across states, with indications that the trend worsened last year. More than half of all children in class 5 are at least three grade levels behind where they should

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  • PROTECT YOUR CONSUMER RIGHTS

    on Jun 27, 13 • in Magazine Issues, Right to Education, RIGHTS • with No Comments

    The Consumer Protection Act is an alternative and cheapest remedy already available to the aggrieved persons/consumers by way of civil suit. In the complaint/appeal/petition submitted under the Act, a consumer is not required   to pay any court fees or even process fee.  Every person is a consumer in one way or other. India is a country having potential for hundred of crore consumers. Inspite of being one of the largest consumer country in the World, there was no direct Act in India to protect the interest of the consumers till the year 1986. In 1986,

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