All Rights

Published on Jul 20, 17 |     Story by |     Total Views : 83 views

Pin It

Home » Editorial, Magazine Issues » धैर्य और संयम के साथ करें इंतजार, फल मीठा ही मिलेगा

धैर्य और संयम के साथ करें इंतजार, फल मीठा ही मिलेगा

एसटी के औपचारिक तौर पर लागू हो जाने के बाद समझ में आ रहा है कि इसे जमीन पर उतारना कितना मुश्किल है। आज भी इसे लेकर तरह-तरह की भ्रांतियों और आशंकाओं का बाजार गर्म है। कारोबारियों का एक तबका बेवजह आतंकित हो गया है। इससे संदेह होता है कि या तो सरकार की तरफ से लोगों को ठीक से जानकारी नहीं दी गई, या फिर इसके सिद्धांत और व्यवहार में बहुत बड़ा फासला है। यूं तो जीएसटी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला एक महीने पहले से चल रहा था, लेकिन इसके लागू होते ही इनमें और तेजी आ गई है। अधिकांश व्यापारिक संस्थानों में सिस्टम अपडेट नहीं हो सका है। ऑटोमोबाइल सेक्टर को छोडक़र और कहीं उपभोक्ताओं को जीएसटी की कम दर का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। ज्यादातर व्यापारी आज भी पुरानी दर पर ही सामान बेच रहे हैं। कुछ राज्य दोराहे पर खड़े हैं।

नेतृत्व के अंर्तद्वंद्व की वजह से कहीं जनता को भारी नुकसान का सामनान करना पड़े। जैसे, प. बंगाल सरकार जीएसटी लागू करने के लिए और वक्त मांग रही है। यह मिल भी गया तो वह 15 सितंबर के बाद वैट या दूसरे कर नहीं वसूल सकती। उसके लिए कानून में संशोधन करना पड़ेगा। राज्य में जीएसटी के तहत वितरकों का पंजीकरण नहीं होने के चलते दवाओं की सप्लाई नहीं हो रही। मिठाइयों पर कर की दरें अलग-अलग होने की वजह से आज खरीदार और विक्रेता दोनों परेशान हैं। बंगाल की मशहूर मिठाई संदेश पर पांच फीसदी जीएसटी लगेगा तो चॉकलेट वाली मिठाइयों पर 18 फीसदी। जम्मू-कश्मीर सरकार ने अब तक जीएसटी को स्वीकार ही नहीं किया है। घाटी में मौजूद सारे राजनीतिक दल और व्यापारिक संस्थाएं इसका विरोध कर रही हैं, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि ‘एक देश-एक कर’ अपनाकर वे अनुच्छेद 370 के तहत मिली अपनी स्वायत्तता खो देंगे। केंद्र को जल्दी ही राज्य नेतृत्व से बात कर कोई हल निकालना होगा। कुछ राज्यों में फिल्म देखना सस्ता हो गया है तो कुछ में महंगा। तमिलनाडु में थिअटर मालिक स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स का विरोध करते हुए हड़ताल पर हैं। उन्हें 28 फीसदी जीएसटी के अलावा 30 फीसदी टैक्स अलग से देना पड़ेगा। दरअसल वहां फिल्मों पर एंटरटेनमेंट टैक्स या तो बेहद कम, या बिल्कुल नहीं लगता था। 28 प्रतिशत जीएसटी उन पर एक बोझ की तरह आया है। दूसरी तरफ बिहार और यूपी में, जहां 40-50 फीसदी तक मनोरंजन कर लगता रहा है, वहां मात्र 28 फीसदी जीएसटी लगने से सिनेमा दर्शकों को राहत मिली है। बहरहाल, सरकार को तमाम दुविधाएं दूर करने में और ज्यादा तत्परता दिखानी होगी। साथ ही व्यापारियों और आम लोगों को भी धैर्य रखना होगा, क्योंकि इतने बड़े बदलाव के सारे अच्छे-बुरे पहलू रातोंरात तो नहीं उजागर हो जाएंगे.

दूसरी तरफ, जिस तरह से इजरायल में नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत हुआ है, उससे साफ है कि इजरायल भारत को कितना महत्व देता है। दरअसल भारत जैसे समर्थ देश की मैत्री विश्व स्तर पर इजरायल की स्वीकृति को भी और बढ़ाती है। हाल तक इजरायल तमाम क्षमताओं के बावजूद अलगाव झेलता रहा है। अब भारत को विश्व मंच पर खुलकर साथ देने वाला एक सबल साथी मिल गया है। इस यात्रा से संबंधों के इस स्वरूप पर मुहर लग गई है, या कहें कि इससे एक नई शुरुआत हुई है। बहरहाल दोनों देशों के बीच इस बार सात समझौते हुए हैं जिनमें तीन अंतरिक्ष क्षेत्र को लेकर हैं। एक छोटे सैटलाइट को लेकर है, दूसरा जियो लिंक के लिए और तीसरा एटॉमिक क्लॉक में सहयोग के लिए। कृषि क्षेत्र में विकास के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने का भी समझौता हुआ है। पेयजल और सफाई व्यवस्था तथा जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सहयोग करने का निर्णय हुआ है। इसके अलावा यूपी में क्लीन गंगा प्रॉजेक्ट में मिलकर काम करने पर भी दोनों देशों में सहमति बनी है। दोनों मुल्कों ने वैश्विक समस्याओं और जरूरतों पर भी बात की। उन्होंने आतंकवाद का मिलकर मुकाबला करने का फैसला किया। इजरायल ने भारत के साथ मिलकर थर्ड वर्ल्ड के देशों, खासकर अफ्रीकी लोगों के लिए काम करने की इच्छा जताई। दोनों देशों के बीच हुए समझौते बेहद महत्वपूर्ण हैं और इनमें हमें इजरायल की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। आशा है कि रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग के नए अध्याय जुड़ेंगे। गौरतलब है कि रूस और अमेरिका के बाद इजरायल भारत का तीसरा सबसे बड़ा डिफेंस पार्टनर है। पिछले तीन सालों में भारत ने इजराइल के साथ 26 हजार करोड़ रुपये के रक्षा सौदे किए हैं। इजरायल भारत को एक संभावनापूर्ण बाजार के रूप में देखता है। माना जाता है कि भारत के 30 करोड़ नागरिक मध्य और उच्च मध्य वर्ग के हैं, जिनकी क्रय शक्ति पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के समान है। ये इजरायली निर्यात के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इजरायल का निजी क्षेत्र भारतीय बाजार में प्रवेश को लेकर शिकायत भी करता रहा है। उसकी शिकायतें हमें जल्दी दूर करनी होंगी।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to top