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Published on Nov 8, 17 |     Story by |     Total Views : 82 views

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क्या जानते हैं आप नोटबंदी से जुड़े 10 सच और झूठ

पिछले साल प्रधानमंत्री द्वारा 8 नवंबर को नोटबंदी का ऐलान करने के बाद कई तरह के सच और झूठ का दौर चला था. इसके साथ ही नेता मंत्रियों के कई ऐसे बयान भी आए जिनमें से कुछ सच तो कुछ झूठे साबित हुए. आज नोटबंदी को एक साल पूरा हो रहा है.

आज आपको 9 ऐसे सच और झूठ बता रहा है जो नोटबंदी के बाद चर्चा में रहे.  नोटबंदी के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि नोटबंदी के कदम से कालाधन भारत में वापस आएगा और आतंकवाद भी खत्म होगा. लेकिन सच तो यह है कि नोटबंदी के बावजूद कोई कालाधन वापस नहीं आया और ना ही नकली नोटों का चलन बंद हुआ. सबसे बड़ी बात तो यह कि आरबीआई के पास उसका पूरा पैसा वापस आ गया, काले धन की दूर- दूर तक बात नहीं हुई. जनधन खातों का राग अलापने वाली मोदी सरकार के लिए नोटबंदी के बाद खातों का कम होना बड़ा सवाल खड़ा करता है. वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2014 में जीरो बैलेंस अकाउंट 76.81% थे जो घटकर अगस्त 2017 में 21.41% हो गए और इसका प्रतिशत घटते ही जा रहा है.

नोटबंदी के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 500 और 1000 के नोट कागज़ के टुकड़े हो जायेंगे. इसे बारे में अटॉर्नी जानकर मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 15 लाख करोड़ में से 10 से 11 लाख करोड़ रूपए सरकार के पास वापस लौटेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सच तो यह है कि आरबीआई के पास 99 प्रतिशत नोट वापस आ गए.

नोटबंदी के वक्त वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि अर्थव्यवस्था में सुधार दिखेगा. सरकार यह अनुमान लगा रही थी कि इस कदम से जीडीपी ग्रोथ रेट बढ़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 7.1% जीडीपी ग्रोथ रेट का सरकार को अनुमान था जो फिसलकर 5.7% हो गया. यही नहीं, आरबीआई भी ग्रोथ रेट आने वाले समय में और कम होने की बात कह रही है.

बैंक में जमा हो रहे 500 और 1000 रूपए के नोटों को लेकर यह अफवाह उड़ी थी कि आरबीआई के पास इतने नोट आ रहे हैं कि उन्हें गिनती करने में मशीनें खराब हो रही हैं. जबकि एक आरटीआई में यह खुलासा हुआ था कि नोट गिनने के लिए मशीनों का इस्तेमाल हुआ ही नहीं. बाद में आरबीआई ने बताया कि वो 66 करंसी वेरिफिकेशन मशीनें इस्तेमाल कर रही है.

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