All Rights

Published on Nov 12, 15 |     Story by |     Total Views : 20,219 views

Pin It

Home » Human Rights, Magazine Issues, Right to Education » ग्राम सभा के अधिकार क्या हैं

ग्राम सभा के अधिकार क्या हैं

gram sabha ke adhikarग्राम सभा क्या है?

ग्राम सभा पंचायतीराज की आधारभूत इकाई है। यह ग्राम सभा प्रत्येक राजस्व ग्राम या वन ग्राम में उस गांव के वयस्क मतदाताओं को मिलाकर गठित की जाती हैै। यानि गांव का प्रत्येक मतदाता ग्राम सभा का सदस्य होता है। ग्राम सभा किसी एक गांव या पंचायत का चुनाव करने वाले गांवों के समूह की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों से मिलकर बनी संस्था है।

ग्राम सभा की संरचना- 

ग्राम सभा में राज्य निर्वाचन आयोग (पंचायत एवं स्थानीय निकाय) द्वारा तैयार पंचायत क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज सभी लोग सदस्य होते हैं। ग्राम सभा में 200 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना आवश्यक है। प्रत्येक ग्राम सभा में एक अध्यक्ष होगा, जो ग्राम प्रधान, सरपंच अथवा मुखिया कहलाता है, तथा कुछ अन्य सदस्य होंगे।

ग्राम सभा में 1000 की आबादी तक 1 ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य), 2000की आबादी तक 11 सदस्य तथा 3000 की आबादी तक 15 सदस्य होंगे।

ग्राम सभा की बैठक-

ग्राम सभा की बैठक वर्ष में दो बार होनी आवश्यक है। इस बारे में सदस्यों को सूचना बैठक से 15 दिन पूर्व नोटिस से देनी होती है। ग्राम सभा की बैठक को बुलाने का अधिकार ग्राम प्रधान को है। वह किसी समय आसामान्य बैठक का भी आयोजन कर सकता है। ग्राम सभा में एक साल में दो बैठकें ज़रूर होती हैं, जिसमें एक बैठक ख़रीफ़ की फसल कटने के बाद तथा दूसरी रबी की फसल काटने के तुरन्त बाद सम्पन्न होती है। ग्राम सभा की अध्यक्षता प्रधान या उसकी गैरमूजदगी में उपप्रधान करता है। दोनोंकी अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत के किसी सदस्य को प्रधान द्वारा मनोनीत किया जा सकता है। जि़ला पंचायत राज अधिकारी या क्षेत्र पंचायत द्वारा लिखित रूप से मांग करने पर अथवा ग्राम सभा के सदस्यों की मांग पर प्रधान द्वारा 30 दिनों के भीतर बैठक बुलाया जाएगा।

यदि ग्राम प्रधान बैठक आयोजित नहीं करता है तो यह बैठक उस तारीख़ के 60 दिनों के भीतर होगी, जिस तारीख़ को प्रधान से बैठक बुलाने की मांग की गई है।  ग्राम सभा की बैठक के लिए कुल सदस्यों की संख्या के 5वें भाग की उपस्थिति आवश्यक होती है। किन्तु यदि गणपूर्ति (कोरम) के अभाव के कारण बैठक न हो सके तो इसके लिए दुबारा बैठक का आयोजन किया जा सकता है।

ग्राम सभा के कार्य-

  •  ग्राम सभा गांव के हित में योजना बनाती है, और उन्हें लागू करती है।
  •  ग्राम सभा ग्राम पंचायत का बजट पारित करती, कर एकत्रण के नियम बनाती है।
  •  सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करती है।
  •  लाभार्थियों का चयन करती है।
  •  जनसुनवाई के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाती है।
  •  समाज के सभी वर्गों मे मेल-जोल व एकता बढ़ाने का करती है।
  •  प्रौढ़ शिक्षा का कार्यक्रम की व्यवस्था करती है।
  •  अन्य मामले जो पहले से तय हों (जैसे परिवार कल्याण, पर्यावरण सुधार,टीकाकरण)

 राज्यों में ग्राम सभा की स्थिति-

बिहार, असम, मध्य प्रदेश में चार बार ग्रामसभा आयोजित करने का प्रावधान है।

गुजरात एवं महाराष्ट्र में वर्ष में दो बार ग्रामसभा करने का प्रावधान है।

गुजरात में ग्रामसभा लेखा-जोखा पर विचार करेगी एवं सुझाव देगी, लेकिन ग्राम पंचायत के लिए इसे मानना बाध्यकारी नहीं है।

इस रूप में गुजरात सहित हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के पंचायत अधिनियम प्रगतिशील नहीं माने जा सकते।

मध्यप्रदेश में ग्रामसभा सचिव द्वारा बुलाई जाती है।

बिहार में ग्रामसभा की बैठक की सूचना पन्द्रह दिन पहले नोटिस चिपका कर,डुगडुगी बजवाकर, व्यक्तिगत संपर्क के आधार पर दिए जाने का प्रावधान है। बच्चों को उसके स्कूल में सूचना दी जाएगी, ताकि वे अपने अभिवावकों को ग्रामसभा की सूचना दे सकें।

ग्रामसभा की बैठक का कोरम कुल सदस्य के 20 वें भाग से होगा। पूरा नहीं होने पर बाद में 40वें भाग से भी कोरम पूर्ति की अनुमति दी गई है।

प्रदेश में तीन महीने के अंतराल पर ग्रामसभा आयोजित किए जाने का प्रावधान है।

बिहार एवं आंध्रप्रदेश के प्रत्येक गांव में ग्रामसभा का प्रावधान है।

दरबार बैठक के लिए 5वें भाग की उपस्थिति आवश्यक नहीं होती है।

ग्राम सभा को मजबूत करने के उपाय-

ग्रामसभा को मजबूत बनाए बिना देश में स्वराज नहीं आ सकता। हमारे देश में पंचायती राज कानून बने, पर पंचायतों को उसका अधिकार नहीं दिया गया। पंचायतों को ताकत देने के लिए एक संवैधानिक सुधार की जरूरत भी है।

सूचना अधिकार के प्रयोग से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आ सकती है।

ग्रामीणों में जागरुकता के बाद ही वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा, ऑडिट रिपोर्ट, गांव की योजना से संबंधित रजिस्टर, अगले वर्ष होने वाले खर्च का लेखा-जोखा भी देखा जा सकता है।

इसके अलावा निगरानी समिति का गठन, पंचायतों को वित्तीय अधिकार देने, अफसरशाही पर अंकुश, पंचायत प्रतिनिधियों के अपमानपूर्ण व्यवहारों, भयादोहन आदि को रोकना होगा।

निचले स्तर पर भ्रष्टाचार मिटाने के गंभीर प्रयास करने जैसे कार्यों से ही ग्रामसभा सशक्त होगी।

Related Posts

3 Responses to ग्राम सभा के अधिकार क्या हैं

  1. lnrathore says:

    Respected Sir,
    ” ग्राम सभा की बैठक के लिए कुल सदस्यों की संख्या के 5वें भाग की उपस्थिति आवश्यक होती है। ”
    उक्त तथ्य कौन से अधिनियम एवं धारा में लिखा है। कृपया बताने का कष्ट करे।
    धन्यवाद्

  2. anupam tripathi says:

    in my village 5 % of work also not be done …i am not satisfied people are facing water demand there is lack of bore well ..i cant explain in words about the worst condition of my village

  3. Guddu says:

    My village me itna dishonestly Hoti h ki toilet ghatiya banay h our ish samay kai parkar ke village me government Kary ho rha h jishme Jo kam nhi krta ushka bhi attendance laga kr paisha nikalwa kr kha Kate h

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to top