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Published on Oct 26, 16 |     Story by |     Total Views :

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बच्चों में दिल की बीमारी क्यों

heart-problemक्या बच्चे दिल की बीमारी से प्रभावित होते हैं? इस प्रश्न का उत्तर अनिच्छा से “हाँ” ही दिया जाएगा। वयस्कों में दिल की बीमारियों के बारे में सुन लेने से ही आपकी रीढ़ अंदर तक काँप जाती है; उस भय की कल्पना कीजिए जो एक बच्चे को इस प्रकार की अनिष्टकारी दिल की बीमारियों के हो जाने से होता है। बच्चों में दिल की बीमारियाँ वायरल इंफ़ौक्शन सहित कई बहानों से हो जाती हैं, जो अपनी शुरुआत में दिल को, अस्वस्थ्यता या जेनेटली सिंड्रोम और जन्मजात दिल की बीमारियों से प्रभावित करती हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान में हुए क्रांतिकारी विकास के प्रति आभार, जिनसे अब सबसे संभव तरीके से इस दुराग्रही विकार की स्थिति के अनुसार, कई इलाज उपलब्ध हैं।
बच्चों में अक्सर होने वाली सबसे अधिक सामान्य दिल की बीमारियाँ यहाँ नीचे दी जा रही हैं:
जन्मजात दिल की बीमारी
यह एक ऐसी बीमारी है जो बच्चे में उसके जन्म से पहले ही प्रवेश कर जाती है। हृदय में छेद होना वास्तव में उस वॉल में नुक्सान देता है, जो दिल के बांए कक्ष को दांए कक्ष से अलग करती है। गंभीर हृदय वाल्व और हृदय की मांसपेशियों की स्थितियाँ, बच्चों में जन्मजात दिल के विकार पैदा करने के लिए ज़िाम्मेदार हैं।
एथेरोस्क्लेरोसी
एथेरोस्क्लेरोसिस एक ऐसी अवस्था है जिसमें हृदय की धमनी संकरी हो जाती है और व्यक्ति की धमनियों में वसा व कॉलेस्ट्रॉल प्लैक्स के जमा हो जाने के कारण अकड़ जाती है। इस संकरेपन के कारण रक्त के थक्के बन जाते हैं और दिल फेल हो जाता है या दिल का दौरा पड़ जाता है। अत:, बहुत देर हो जाए इससे पहले ही उच्च रक्तचाप की या कॉलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर की जाँच करवा लेनी चाहिए।

अरिद्मिया
अरिद्मिया उन बच्चों में पनपता है जिनमें हृदय गति असामान्य या अनियमित होती है। इसका परिणामी प्रभाव हृदय की रक्त पम्प करने की दर में गिरावट होता है। बच्चों में दिखाई देने वाले अरिद्मिया के विभिन्न स्वरूप हैं हृदय गति की तेज़ा दर, हृदय गति की धीमी दर, ड्ब्ल्यूपीड्ब्ल्यू सिंड्रोम और लॉन्ग क्यू टी सिंड्रोम।
इसेन्मेन्गेर सिंड्रोम
यह सिंड्रोम वास्तव में 3 अलग अलग सिंड्रोम्स के सामूहिक प्रभाव के कारण बना रहता है। वे ऑक्सीज़न के संकुचित स्तर, पुल्मनेरी उच्च रक्तचाप और लाल रक्त कोशिकाओं के काउंट की अधिकता, जिसे पॉलीसिथिमिया कहते हैं, के सुरमई त्वचा के परिणामी होते हैं। यदि बीमारी का सावधानीपूर्वक इलाज न किया जाए तो स्ट्रोक होने, रक्त का थक्का बनने या कभी कभी किडनी फेल होने का भय रहता है।
कावासाकी रोग
कावासाकी रोग उन बच्चों को अपना लक्ष्य बनाता है जो 5 वर्ष की आयु से कम के हैं। यह एक ऐसा अजीब विकार है जिसमें पैरों, हाथों, गले, मुँह और होठों की रक्त वाहिकाओं में शोथ जैसी हालत हो जाती है। दिल की ऐसी बीमारी को झेल रहे बच्चों को, प्रचलित परिदृश्य की परवाह किए बिना अपनी हृदय की अवस्था की स्थाई रूप से निगरानी करनी होती है।
हार्ट मरमर्स
मूल रूप से यह रक्त वाहिकाओं, हृदय वाल्व या कक्ष में अचानक बह निकले रक्त द्वारा की जाने वाली भिनभिनाने की आवाज़ा होती है। दिल द्वारा की जाने वाली इस भिनभिनाने की आवाज़ा के साथ बुखार, अनीमिया या जन्मजात हृदय के विकार उभरते हैं। कुछ मरमर्स स्वयं ही समाप्त हो जाते हैं किंतु सभी समाप्त नहीं होते हैं। इसलिए इस प्रकार की भिनभिनाहट की आवाज़ों का इलाज करते समय मेडिकल मार्गदर्शन ज़ारूरी हो जाता है।
पेरिकार्डिटिस सिंड्रोम
रक्त की आवश्यक मात्रा को पम्प करने दिल की क्षमता में खराबी को पेरिकार्डिटिस कहा जाता है। यहाँ, तरल पदार्थ परतों के बीच छलांग मारता है। इसके होने के कारणों में सीने में अभिघात, टिश्यू विकार या वायरल इंफ़ैाक्शन आते हैं।
रूमैटिक दिल की बीमारी
इस बीमारी में हृदय वाल्व्स और मांसपेशियाँ बुरी तरह प्रभावित होते हैं और हमेशा के लिए इनके क्षतिग्रस्त होने संभावना हो जाती है। एंटिबायोटिक दवाइयों की सहायता से स्ट्रेप थ्रॉट ठीक करके इसका इलाज किया जा सकता है।

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