All Rights

Published on May 19, 17 |     Story by |     Total Views : 69 views

Pin It

Home » Editorial, Magazine Issues » जनता के भरोसे पर खरा उतरने की परीक्षा है ये जीत

जनता के भरोसे पर खरा उतरने की परीक्षा है ये जीत

एक बात साफ हो गई कि आम आदमी पार्टी पंजाब, गोवा, दिल्ली में राजौरी गार्डन की हार और अब एमसीडी की हार के बावजूद आत्ममंथन नहीं करना चाहती. उसे लगता है कि ऐसा करना केजरीवाल के करिश्मे का अपमान होगा. इसके बजाए आरोपों के आंदोलन से पैदा हुई ये पार्टी एक बार फिर एक नए आंदोलन पर सवार हो कर देश में ईवीएम के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है.


लगभग 10 साल की विरोधी सत्ता को हराकर, भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली के एमसीडी चुनाव में अपनी जीत का परचम लहराया है. राज्य में पांच नगर निकायों में से तीन, पूर्व दिल्ली नगर निगम, उत्तर दिल्ली नगर निगम और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम 23 अप्रैल 2017 को चुनाव में शामिल हुए.

भाजपा की असाधारण जीत के लिये दो मुद्दों को श्रेय दिया जा सकता है जिसमे एक तो मोदी लहर जिसका पार्टी दावा करती थी तथा दूसरा प्रतिद्वंद्वियों जैसे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जैसी पार्टियों की असफलता को. भाजपा नें 270 वार्डों में से 267 (2 वार्डों पर चुनाव रद्द) पर अपने उम्मीदवारों को उतारा था. यह एक संकेत है कि यह अपने मौजूदा उम्मीदवारों को एमसीडी में अपने ऐच्छिक प्रदर्शन के लिए विफलता को स्वीकार करती है. इसे पार्टी द्वारा परिवर्तन और सुधार के वादे के रूप में भी देखा जा सकता है.

क्या इसका मतलब यह है कि आम आदमी पार्टी अपने वादों को पूरा करने में असफल रही और दिल्ली के लोगों द्वारा उस पर भरोसा रखने वाले विश्वास को बरकरार नहीं रख पाई? इस प्रश्न का उत्तर बहस के लिए है, हालांकि, बीजेपी पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि दिल्ली के लोगों ने एमसीडी चुनाव में बीजेपी को चुना है, जो प्रशासन द्वारा प्रशासनिक विफलताओं और नकारात्मक राजनीति के लिये गये बहानों से निराश हुए हैं. सामूहिक रूप से सभी भाजपा नेताओं और उम्मीदवारों का मानना है कि इस ऐतिहासिक जीत के लिए प्रधानमंत्री मोदी जिम्मेदार हैं. दिल्ली एमसीडी चुनाव 2017 में भाजपा नें कुल 68 प्रतिशत सीटें जीतीं हैं जबकि दिल्ली एमसीडी चुनाव 2012 में भाजपा केवल 51 प्रतिशत सीटें ही प्राप्त कर पाई थी.

एक बात साफ हो गई कि आम आदमी पार्टी पंजाब, गोवा, दिल्ली में राजौरी गार्डन की हार और अब एमसीडी की हार के बावजूद आत्ममंथन नहीं करना चाहती. उसे लगता है कि ऐसा करना केजरीवाल के करिश्मे का अपमान होगा. इसके बजाए आरोपों के आंदोलन से पैदा हुई ये पार्टी एक बार फिर एक नए आंदोलन पर सवार हो कर देश में ईवीएम के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है. बड़ा सवाल ये है कि हार के बहानों की राजनीति से आम आदमी पार्टी अब खुद का कितना बड़ा नुकसान करना चाहती है. आप पर अपने कामों के विज्ञापन के लिये 97 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप है. बेहतर होता कि वो विकास के दावों को जनता तक अपनी डोर टू डोर शैली से पहुंचाने का काम करती. लेकिन नेगेटिव कैम्पेन ने उसे खुद ही कटघरे में खड़े करने का काम किया. अब जब नतीजों ने केजरीवाल एंड टीम को हताशा में डुबा दिया है तो एक बार फिर बात खंभा नोंचने की हो रही है. आम आदमी पार्टी को खुद ये सोचना होगा कि जब वो दो साल के भीतर अपनी ही अवाम के दिल में भरोसा जगाने में कामयाब नहीं हो सकी है तो ईवीएम के मुद्दे पर वो अपने आरोपों को कैसे साबित कर पाएगी.

अपनी जमीन तलाश रही कांग्रेस के लिए एक बार फिर ये मंथन का दौर है कि आखिर क्यों वो दिल्लीवासियों के दिल में अपने लिए विश्वास पैदा करने में नाकाम साबित हुई. चुनाव के नतीजों पर पीएम मोदी जी ने जहां बीजेपी पर भरोसा जताने के लिए दिल्ली की जनता का आभार जताया है और साथ ही बीजेपी वर्कर्स की कड़ी मेहनत की तारीफ की है वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर बीजेपी को बधाई दी. उन्होंने कहाकि हमारी सरकार एमसीडी में मिलकर काम करेगी.

इन नतीजों से साफ जाहिर है कि विपक्ष ने बीजेपी पर एमसीडी को लेकर जो भी आरोप लगाये थे. दिल्ली की जनता ने उसे नकारते हुए बीजेपी को जबरदस्त बहुमत दिया है जिससे 270 सीटों के लिए हुए इस मुकाबले में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और अब ये देखना दिलचस्प होगा कि आप के साथ बीजेपी का तालमेल कितना सही होता है जिससे दिल्ली की जनता ने जो भरोसा बीजेपी पर दिखाया है बीजेपी उसपर कितना खरी उतरती है.

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to top