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Published on Jan 30, 15 |     Story by |     Total Views :

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खत्म हुआ ड्रामा बाबा रामपाल का पर्दाफाश

रामपाल को अरेस्ट करने में पुलिस का खासी मशक्कत करनी पड़ी. पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच झड़पें भी हुईं जिसमें कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई. हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर के ओएसडी जवाहर यादव का कहना है कि पूरी प्लानिंग के तहत रामपाल को अरेस्ट किया गया है. उन्हें कहां ले जाया गया है इसके बारे में फिलहाल मीडिया से बताना सही नहीं है. जवाहर यादव का कहना है कि रामपाल की कोशिश थी कि पुलिस की कार्रवाई बिना प्लानिंग हो, वहां भगदड़ मचे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की मौत हो और इस तरह वे गिरफतारी से बच जाएं, लेकिन पुलिस बेहतरीन प्लानिंग के तहत उन्हें गिरफतार किया है.


p22चौदह  दिन तक चले जानलेवा ड्रामे के बाद हरियाणा पुलिस ने आखिरकार विवादित धर्मगुरु रामपाल को अरेस्ट कर लिया है.  उन्हें रात 9.15 बजे हिसार के सतलोक आश्रम से पकड़ा गया. रामपाल को भारी सुरक्षा के बीच पुलिस एंबुलेंस में बैठाकर आश्रम से ले गई है. जैसे ही पुलिस रामपाल को आश्रम से अरेस्ट करके ले गई. वहां मौजूद लोगों के बीच जश्न का माहौल बन गया, मौजूद लोगों ने खुशी में रामपाल के खिलाफ नारेबाज़ी भी की.

आपको बता दें कि रामपाल को अरेस्ट करने में पुलिस का खासी मशक्कत करनी पड़ी. पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच झड़पें भी हुईं जिसमें कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई. हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर के ओएसडी जवाहर यादव का कहना है कि पूरी प्लानिंग के तहत रामपाल को अरेस्ट किया गया है. उन्हें कहां ले जाया गया है इसके बारे में फिलहाल मीडिया से बताना सही नहीं है. जवाहर यादव का कहना है कि रामपाल की कोशिश थी कि पुलिस की कार्रवाई बिना प्लानिंग हो, वहां भगदड़ मचे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की मौत हो और इस तरह वे गिरफतारी से बच जाएं, लेकिन पुलिस बेहतरीन प्लानिंग के तहत उन्हें गिरफतार किया है.

रामपाल के समर्थकों का दावा था कि रामपाल आश्रम में नहीं हैं और हरियाणा के किसी अनजान जगह पर उनका इलाज किया जा रहा है, लेकिन हरियाणा के डीजीपी एस एन वशिष्ठ ने कहा था कि रामपाल सतलोक आश्रम में ही हैं, जो बात सच निकली. डीजीपी ने बताया कि जिन महिलाओं की मौत हुई है उनके नाम सविता, संतोष, मलकीत और राजबाला हैं. डीजीपी के मुताबिक आश्रम में हुई 2 मौत नेचुरल हैं जबकि 4 मौतों की जांच जारी है. जिन लोगों की मौत हुई है उनमें डेढ़ साल का एक बच्चा भी शामिल है. पुलिस से झड़प के मामले में रामपाल के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है.

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से दो गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद संत रामपाल अदालत में पेश नहीं हुए. 10 नवंबर को ही हरियाणा पुलिस को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने 17 नवंबर की सुबह 10 बजे तक संत रामपाल को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था. अब पेशी की तारीख 21 नवंबर हो चुकी है.

बरवाला आश्रम का ये इलाका छावनी बन गया. चंडीगढ़ में एक हजार पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. पत्थर चल गए, गोलियां चल गईं, लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि एक बाबा क सामने बेबस नजर आ रहा है पूरा प्रशासन. हरियाणा चुनाव के दौरान बीजेपी ने हुड्डा सरकार की कानून व्यवस्था पर सबसे ज्यादा सवाल खड़े किये थे लेकिन आज हरियाणा की बीजेपी सरकार सवालों के घेरे में हैं. हरियाणा पुलिस ने आज अपनी करतूत को छुपाने के लिए पत्रकारों को बुरी तरह से मारा पीटा है.  कैमरा तोड़ दिया और अब दोषी पुलिसवालों पर कार्रवाई के बजाय थोथी दलील दे रही है. गृह मंत्रालय ने हिसार में पुलिस कार्रवाई और पत्रकारों की पिटाई को लेकर रिपोर्ट मांगी है. ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन ने पत्रकारों की पिटाई की निंदा की है सवाल ये है कि बाबा पर जोर नहीं चल रहा तो मीडिया पर पुलिस अपना गुबार क्यों निकाल रही है आखिर ऐसा किया क्यों? कहीं ये खिसियानी बिल्ली खंभा नोचेवाली बात तो नहीं हैं.

 

संत रामपाल जी महाराज है कौन?

संत रामपाल जी महाराज किसी भगवान को नहीं मानते, किसी भी देवी देवता की पूजा के खिलाफ हैं संत रामपाल, लेकिन कबीरपंथी रामपाल खुद को परमेश्वर बताते हैं.  हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर से रामपाल के परमेश्वर बनने तक की कहानी बड़ी दिलचस्प है. जूनियर इंजीनियर की नौकरी के दौरान संत रामपाल महाराज की मुलाकात 107 साल के कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई थी. रामपाल रामदेवानंद महाराज के शिष्य बन गए और 18 साल लंबी सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर की नौकरी छोडक़र सत्संग करने लगे.

आज संत रामपाल हरियाणा के हिसार जिले के सतलोक आश्रम के मालिक हैं. 12 एकड़ में फैला उनका आश्रम किसी महल से कम नहीं है,लेकिन छावनी में तब्दील हो चुका हिसार के इस आश्रम की कहानी रोहतक से शुरू होती है.  साल 1999 में रामपाल ने रोहतक के करौंथा में अपना आश्रम शुरू किया था. रामपाल देवी देवता की पूजा के खिलाफ हैं और रामपाल की इस कबीरपंथी सोच के खिलाफ है आर्यसमाज. लेकिन सोच का ये फर्क साल 2006 में जमीन के विवाद के रूप में सामने आया.

दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक 2006 में स्वामी दयानंद की लिखी एक किताब पर संत रामपाल ने एक टिप्पणी की, आर्यसमाज को ये टिप्पणी बेहद नागवार गुजरी और दोनों के समर्थकों कें हिंसक झडप हुई. घटना में एक की मौत भी हो गयी. घटना के बाद एसडीएम ने 13 जुलाई 2006 को आश्रम को कब्जे में ले लिया. रामपाल और उनके 24 समर्थकों को गिरफतार कर लिया गया. 2006 में रामपाल पर हत्या का केस दर्ज हुआ था जिसमें उन्हें 21 महीने जेल में रहना पड़ा था. तब से जमानत पर हैं रामपाल.

लेकिन रामपाल ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में केस जीता और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर से रोहतक का आश्रम फिर वापस मिल गया. इस जमीन को लेकर आश्रम के आसपास के गांव वालों का विरोध इतना ज्यादा है कि जब रामपाल के समर्थक पिछले साल आश्रम पर कब्जा करने गए तो नाराज गांव वालों और आर्य समाज के लोगों ने इन पर धावा बोल दिया.

हरियाणा में रामपाल का काफी विरोध है. इसलिए पड़ोसी राज्यों पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान से समर्थक जुटाते हैं रामपाल. इन राज्यों से काफी तादाद में इनके अनुयायी हरियाणा आते हैं. बाबा जमानत पर बाहर तो आ गए लेकिन साल 2006 में हिंसक झड़प में हुई मौत का मामला खत्म नहीं हुआ था. इसी मामले में अगस्त 2014 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए रामपाल की हिसार कोर्ट में पेशी थी. लेकिन बाबा के समर्थक कोर्ट पहुंच गए और वहां वकीलों से बदसलूकी की.

नाराज वकीलों ने रामपाल की जमानत रद्द करने की याचिका दे दी. हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना के इस मामले में रामपाल को दो बार पेशी का नोटिस भेजा लेकिन रामपाल खराब तबीयत की दलील देकर हाजिर नहीं हुए. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इसे अदालत की अवमानना मानते हुए रामपाल को अरेस्ट  करने के आदेश जारी कर दिए

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One Response to खत्म हुआ ड्रामा बाबा रामपाल का पर्दाफाश

  1. SS Gupta says:

    ढोंगी राम पाल का ऐसा ही हाल होना ही था। पागल या ज्यादा दिमाग वाला है। जिसके कारन पैसो का लालच बढ़ गया। जो ज्ञान देता है वो भी गलत,मुझे लगता है हिन्दू महा सभा को ध्यान देना चाहिए। इसे फांसी होनी चाहिए।

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