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Published on Jul 21, 17 |     Story by |     Total Views : 313 views

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क्या है जीएसटी बिल और क्या होंगे इसके फायदे

जीएसटी आम लोगों के कल्याण की दिशा में योगदान करने के साथ ही व्यवसायियों के लिए भी हितकर है।  यह  आतंकवाद और इंस्पेक्टर राज को समाप्त कर बिजनसमैन की मदद करेगा। किसी शब्द की नई परिभाषा देने के लिए मशहूर पीएम मोदी ने जीएसटी को गुड ऐंड सिंपल टैक्स करार दिया।


GSTसंसद के सेंट्रल हाल में जीएसटी शुरू करने के कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एनडीए 2003 में नितिन गोलाकर की अगुवाई में एक रिपोर्ट तैयार की गई। और 2006 यूपीए तत्कालीन वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने संविधान पेश किया गया। इसी के बाद जीएसटी समिति का गठन हुआ। इस समिति का अध्यक्ष किसी प्रदेश के केंद्र की विपक्षी दल का वित्तमंत्री बनता था, जिसमें सबसे पहले सीपीआई एम सरकार के प.बंगाल के वित्तमंत्री असीमदास गुप्ता रहे। एक देश एक कर हमारा उद्देश्य रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ ऐसे पल आते हैं कि हम नई व्यवस्था की तरफ चल पड़ेगा। इस पवित्र अवसर पर देश नया रास्ता चुन रहा है जिसमें किसी एक दल व एक सरकार की सिद्धि नहीं है, जीएसटी हम सभी की साझा विरासत है। जीएसटी लंबी विचार प्रक्रिया का नतीजा है जैसे इसी हाल में संविधान बना था। जीएसटी भी ऐतिहासिक है जिसमें केंद्र व प्रदेश दोनों को एक धागे पिरोने का कार्य हुआ है। जीएसटी की तुलना करते हुए श्री मोदी ने कहा कि गीता के 18 अध्याय की तरह जीएसटी कौंसिल की 18 बैठक हुई। 500 टैक्स बदल कर एक टैक्स पूरे देश में लागू हो रहा है। ये सपना पूरा हो रहा है। जीएसटी से आर्थिक एकीकरण का काम होगा। जीएसटी से देश आधुनिकता की ओर बढ़ेगा। गरीबों को आर्थिक स्तर पर सबसे फायदा जीएसटी से मिलेगा। ईमानदार व्यापारी परेशान नहीं होगा। जीएसटी से भ्रष्टाचार व कालाधन खत्म होगा। विश्व व्यापार को देश में निवेश में आसानी होगी। व्यापार में जीएसटी संतुलन पैदा करेगा और राज्यों का विकास होगा। जीएसटी न्यू इंडिया का टैक्स है। इससे चिंता करने की जरूरत नहीं है। कार्यक्रम के अंत में प्रणव मुखर्जी ने कहा कि कुछ मिनट में जीएसटी का शुभारंभ होगा। जीएसटी एक ऐतिहासिक कदम है। महामहिम ने इससे जुड़ी यादों को साझा करते हुए कहा कि 16 बार काउंसिल में शामिल हुआ और राज्यों के वित्तमंत्री से जीएसटी में सहयोग लिया। और कई राज्यों के सीएम से मुलाकात भी की। जीएसटी में मेरा विश्वास सही निकला, राजनीति की दलगत भावना से उठकर लोगों ने कार्य किया है। इससे  स्पर्धा में सामान सुअवसर मिलेंगे। जब कोई परिवर्तन होता है विरोध होता है। जीएसटी शुरुआती चरण में है, परेशानियां तो आएंगी। इसके बाद दोनों ने घंटी बजा कर जीएसटी लागू किया। इस कार्यक्रम में हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी गौड़ा सहित 1000 विशिष्ट गणमान्य मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जीएसटी आम लोगों के कल्याण की दिशा में योगदान करने के साथ ही व्यवसायियों के लिए भी हितकर है। उन्होंने कहा कि यह  आतंकवाद और इंस्पेक्टर राज को समाप्त कर बिजनसमैन की मदद करेगा।

किसी शब्द की नई परिभाषा देने के लिए मशहूर पीएम मोदी ने जीएसटी को गुड ऐंड सिंपल टैक्स करार दिया। उनका इतना कहना ही था कि सभागार में तालियों की गडग़ड़ाहटा गूंजने लगी। उन्होंने कहा, जीएसटी गुड ऐंड सिंपल टैक्स है जो बहु-स्तरीय टैक्स सिस्टम के प्रभाव को खत्म करेगा।  पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले आज काउंसिल की 18वीं बैंठक हुई। मोदी ने कहा कि गीता के भी 18 अध्याय थे और जीएसटी काउंसिल की भी 18 बैठकें हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था को लेकर तमाम आशंकाएं थीं, लेकिन इसे तमाम प्रयासों के बाद लागू किया जा सका है। चाणक्य का उद्धरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कोई वस्तु कितनी ही दूर हो या कठिन हो, लेकिन तपस्या के जरिए उसे पाया जा सकता है। पीएम उन्होंने कहा कि देश की आजादी के वक्त सरदार पटेल ने जिस तरह 500 से ज्यादा रियासतों को मिलाकर एक किया था, उसी तरह जीएसटी के जरिए देश का एकीकरण हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि देश के 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 500 से ज्यादा टैक्सों का विलय हो जाएगा। अब गंगा नगर से ईटानगर एक टैक्स, एक देश का नारा गूंजेगा।

अरुण जेटली ने कहा कि हम गौरवशाली देश के ऐतिहासिक मौके पर उपस्थित हैं। इससे भारत के सामने असीम संभावनाओं के द्वार खुलेंगे और उसे अपनी इकॉनमी को मजबूत करने का मौका मिलेगा। इससे भारत एक मार्केट एक देश के तौर पर उभरेगा। इससे देश के सभी राज्य संघीय ढांचे के तहत एक साथ आगे बढ़ सकेंगे। हमने इसे ऐसे समय में लागू किया है, जब दुनिया धीमी ग्रोथ और संरक्षणवाद के दौर से गुजर रही है। अरुण जेटली ने कहा कि इस लॉन्चिंग के साथ ही देश में 17 से ज्यादा टैक्सों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स ले लेगा।

कांग्रेस और गैर कांग्रेसी विपक्ष के साथ सहमति बनने के बाद जीएसटी बिल पास हो गई. कांग्रेस के अलावा लेफ्ट, बीएसपी और जेडीयू ने भी इस बिल को पेश करने में अपना समर्थन दिया है। हालांकि ये सहमति बनाने के लिए जीएसटी बिल में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं :

  1. जिसके तहत 1 फीसदी इंटरस्टेट ट्रांजेक्शन टैक्स हटाया गया है। मूल विधेयक में राज्यों के बीच व्यापार पर 3 साल तक 1 फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगना था।
  2. बदलाव के बाद अब राज्यों को 5 साल तक 100 फीसदी नुकसान की भरपाई की जाएगी पहले 3 साल तक 100 फीसदी, चौथे साल में 75 फीसदी और पांचवे साल में 50 फीसदी भरपाई का प्रावधान था।
  1. विवाद सुलझाने के लिए नई व्यवस्था की गई है, जिसमें राज्यों की आवाज बुलंद होगी। पहले विवाद सुलझाने की व्यवस्था मतदान आधारित थी, जिसमें दो-तिहाई वोट राज्यों के और एक तिहाई केंद्र के पास थे।
  2. विधेयक में जीएसटी के मूल सिद्धांत को परिभाषित करने वाला एक नया प्रावधान जोड़ा जाएगा, जिसमें राज्यों और आम लोगों को नुकसान नहीं होने का भरोसा दिलाया जाएगा।

क्या है जीएसटी ?

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। जहां जीएसटी लागू नहीं है, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं। सरकार अगर इस बिल को 2016 से लागू कर देती तो हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा।

क्या होंगे इसके फायदे?

संविधान के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगा सकती हैं। अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी लागू होने से देश की जीडीपी में एक से पौने दो फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

किन उत्पादों पर लागू होगा जीएसटी? 2014 में पास संविधान के 122वें संशोधन के मुताबिक जीएसटी सभी तरह की सेवाओं और वस्तुओं/उत्पादों पर लागू होगा। सिर्फ अल्कोहल यानी शराब इस टैक्स से बाहर होगी।

कैसे काम करेगा जीएसटी? जीएसटी में तीन अंग होंगे, केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी। केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र लागू करेगा जबकि राज्य जीएसटी राज्य सरकारें लागू करेंगी।

अगर जीएसटी भी वैट की तरह है तो फिर इसकी जरूरत क्यों?

हालांकि जीएसटी भी वैट जैसा ही टैक्स है, लेकिन इसके लागू होने से कई और तरह के टैक्स नहीं लगेंगे। इतना ही नहीं जीएसटी लागू होने से अभी लगने वाले वैट और सेनवेट दोनों खत्म हो जाएंगे।

किसी भी राज्य में सामान का एक दाम- जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा. पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी। जैसे कोई कार अगर आप दिल्ली में खरीदते हैं तो उसकी कीमत अलग होती है, वहीं किसी और राज्य में उसी कार को खरीदने के लिए अलग कीमत चुकानी पड़ती है। इसके लागू होने से कोई भी सामान किसी भी राज्य में एक ही रेट पर मिलेगा।

कर विवाद में कमी- इसके लागू होने के बाद कई बार टैक्स देने से छुटकारा मिल जाएगा। इससे कर की वसूली करते समय कर विभाग के अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना भी कम हो जाएगी। एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ इसी टैक्स से सारे टैक्स वसूल कर लिए जाएंगे। इसके अलावा जहां कई राज्यों में राजस्व बढ़ेगा तो कई जगह कीमतों में कमी भी होगी।

कम होगी सामान की कीमत- इसके लागू होने से टैक्स का ढांचा पारदर्शी होगा जिससे काफी हद तक टैक्स विवाद कम होंगे। इसके लागू होने के बाद राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स आदि भी खत्म हो जाएंगे। फिलहाल जो सामान खरीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है वो भी घटकर 20-25 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है। जीएसटी लागू होने पर कंपनियों और व्यापारियों को भी फायदा होगा. सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी. जब सामान बनाने की लागत घटेगी तो इससे सामान सस्ता भी होगा।

किसको होगा नुकसान- जीएसटी लागू होने से केंद्र को तो फायदा होगा लेकिन राज्यों को इस बात का डर था कि इससे उन्हें नुकसान होगा क्योंकि इसके बाद वे कई तरह के टैक्स नहीं वसूले पाएंगे जिससे उनकी कमाई कम हो जाएगी। गौरतलब है कि पेट्रोल व डीजल से तो कई राज्यों का आधा बजट चलता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने राज्यों को राहत देते हुए मंजूरी दे दी है कि वे इन वस्तुओं पर शुरुआती सालों में टैक्स लेते रहें। राज्यों का जो भी नुकसान होगा, केंद्र उसकी भरपाई पांच साल तक करेगा।

जीएसटी की लंबी यात्रा

फरवरी, 1986- वित्त मंत्री वीपी सिंह ने 1986-87 के बजट में उत्पाद कराधान व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव रखा.

2000- प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यह अवधारणा पेश की और जीएसटी मॉडल का डिजायन तय करने के लिए पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति गठित की.

2003- वाजपेयी सरकार ने कर सुधारों की सिफारिश करने के लिए विजय केलकर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया.

2004- वित्त मंत्रालय में तत्कालीन सलाहकार विजय केलकर ने वर्तमान कर व्यवस्था के स्थान पर जीएसटी की सिफारिश की.

28 फरवरी, 2006- पहली बार बजट भाषण में जीएसटी का उल्लेख हुआ. वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने जीएसटी लागू करने की समय सीमा एक अप्रैल 2010 तय की. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रियों की उच्चाधिकार समिति जीएसटी के लिए रोडमैप तैयार करेगी.

2008- राज्यों के वित्त मंत्रियों की उच्चाधिकार समिति का गठन. 30 अप्रैल, 2008 को उच्चाधिकार समिति ने सरकार को भारत में वस्तु एवं सेवा कर का मॉडल एवं रोडमैप नामक रिपोर्ट सौंपी.

10 नवंबर, 2009- उच्चाधिकार समिति ने जीएसटी पर परिचर्चा पत्र जारी किया.

2009- वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने दासगुप्ता समिति द्वारा डिजायन किये गये जीएसटी के मूल ढांचे की घोषणा की तथा 2010 की समय सीमा बनाए रखी. भाजपा ने जीएसटी मूल ढांचे का विरोध किया.

फरवरी, 2010-  वित्त मंत्रालय ने जीएसटी लागू करने के वास्ते बुनियाद डालने के लिए राज्यों में वाणिज्यिक करों का मिशन मोड कंप्यूटरीकरण शुरू किया. प्रणब मुखर्जी ने 1अप्रैल 2011 तक के लिए जीएसटी टाला.

22 मार्च, 2011- संप्रग द्वितीय ने जीएसटी लाने के लिए लोकसभा में 115 वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया.

29 मार्च, 2011- जीएसटी विधेयक यशवंत सिन्हा की अगुवाई वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति के पास भेजा गया. असीम दासगुप्ता ने इस्तीफा दिया, तब केरल के वित्त मंत्री मंत्री के एम मणि ने उनका स्थान लिया.

नवंबर, 2012- वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक की और जीएसटी को लागू करने के लिए 31 दिसंबर, 2012 तक सभी मुद्दों को सुलझाने का फैसला किया.

फरवरी, 2013- जीएसटी लागू करने के संप्रग सरकार के निश्चय का एलान करते हुए चिदंबरम ने अपने बजट ने जीएसटी की वजह से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 9,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया.

अगस्त, 2013- संसदीय समिति ने जीएसटी में सुधारों का सुझाव देते हुए संसद को रिपोर्ट सौंपी. जीएसटी विधयेक संसद में पेश किये जाने के लिए तैयार.

अक्टूबर, 2013- गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी ने यह कहते हुए जीएसटी का विरोध किया कि राज्य को जीएसटी की वजह से हर साल 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.

2014- स्थायी समिति द्वारा मंजूर जीएसटी विधेयक की समय सीमा समाप्त क्योंकि लोकसभा भंग हो गई. भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार सत्ता में आई.

18 दिसंबर, 2014- मंत्रीमंडल ने जीएसटी के लिए 122 वां संविधान मंजूर किया.

19 दिसंबर 2014- वित्त मंत्री अरण जेटली ने लोकसभा में जीएसटी से संबंधित संशोधन (122 वां संविधान संशोधन) विधेयक पेश किया जिसका कांग्रेस ने विरोध किया.

फरवरी, 2015- जेटली ने जीएसटी लागू करने के लिए एक अप्रैल, 2016 की समय सीमा तय की.

6 मई 2016- लोकसभा ने जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया.

12 मई, 2105- राज्यसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया. कांग्रेस ने इस विधेयक को राज्यससभा की प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की. उसने 18 प्रतिशत की जीएसटी सीमा की मांग की.

14 मई, 2015- जीएसटी विधेयक राज्यसभा एवं लोकसभा की संयुक्त समिति के पास भेजा गया.

अगस्त, 2015- सरकार को राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिए विपक्ष का समर्थन हासिल नहीं हुआ जहां उसके पास पर्याप्त तादाद में बल नहीं है.

जुलाई, 2016- सरकार ने 18 प्रतिशत जीएसटी संवैधानिक सीमा को मंजूरी नहीं दी. इस विषय पर उसे राज्यों का समर्थन मिला. अगस्त में कांग्रेस और भाजपा संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने पर राजी हुईं.

तीन अगस्त, 2016- राज्यसभा ने दो तिहाई बहुमत से संविधान संशोधन विधेयक पारित किया.

दो सितंबर, 2016- 16 राज्यों ने जीएसटी विधयेक को अनुमोदित किया. प्रणब मुखर्जी ने विधेयक को अपनी मंजूरी दी. 12 सितंबर को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने जीएसटी परिषद के गठन को मंजूरी दी.

22-23 सितंबर- परिषद की पहली बैठक हुई. तीन नवंबर को जीएसटी परिषद 5,12,18 और 28 ञ् की चार स्तरीय कर ढांचे पर सहमत हुई. परिषद विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर अतिरिक्त उपकर लगाने पर भी राजी हुई.

16 जनवरी, 2017- जेटली ने जीएसटी लागू करने की समयसीमा एक जुलाई तय की. केंद्र और राज्यों के बीच दोहरा नियंत्रण और समुद्र में वस्तुओं पर कराधान के विवादास्पद मुद्दे पर सहमति बनी.

18 फरवरी- जीएसटी परिषद ने जीएसटी लागू करने के पहले पांच सालों में राज्यों को होने वाले किसी भी राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्त विधेयक के मसौदे को अंतिम रूप दिया.

20 मार्च- मंत्रीमंडल ने सीजीएसटी, आईजीएसटीऔर यूटी जीएसटी और क्षतिपूर्त विधेयक मंजूरी दी. लोकसभा और राज्यसभा ने चारों अहम जीएसटी विधेयकों- केंद्रीय जीएसटी , समेकित जीएसटी, राज्य जीएसटी और केंद्रशासित प्रदेश जीएसटी (यूटीजीएटी) को पारित किया.

18 मई- जीएसटी परिषद ने 1200 से अधिक वस्तुओं को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के जीएसटी खांचों में समायोजित किया. जीएसटी परिषद ने राज्यों को मुआवजा देने के लिए कोष तैयार करने के वास्ते विलासिता एवं अहितकर वस्तुओं पर उपकर तय किया।

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