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Published on Nov 6, 17 |     Story by |     Total Views :

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मंत्री बनने से पहले छोड़ दी थी कंपनी – जयंत सिन्हा

जर्मनी के जीटॉयचे साइटुंग नामक अखबार जिसने 18 महीने पहले पनामा पेपर्स का खुलासा किया था ने अब 96 मीडिया ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर इंटरनैशनल कॉन्सोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने ‘पैराडाइज पेपर्स’ दस्तावेजों की छानबीन की है। पैराडाइज पेपर्स’ में 1.34 करोड़ दस्तावेज शामिल हैं, जिनमें दुनिया के कई अमीर और शक्तिशाली लोगों के गुप्त निवेश की जानकारी दी गई है।

जिनमें दावा किया गया है कि पूरी दुनिया के अमीर और ताकतवर लोग किस तरह से अपनी काली कमाई को टैक्स से बचाने के लिए ठिकाने लगाते हैं. पैराडाइज पेपर्स में जहां दावा किया गया है कि 714 भारतीय नागरिकों का नाम शामिल है वहीं इसमें कुछ अहम राजनीतिक हस्तियों पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है. इस खुलासे का समय भी बेहद खास है क्योंकि अबसे दो दिन के बाद ही केन्द्र सरकार नोटबंदी की सालगिरह बतौर एंटी ब्लैकमनी डे मनाने जा रही है और इस रिपोर्ट में केन्द्र में सत्तारूढ़ बीजेपी के मंत्रियों और नेताओं का नाम सामने आया है. पैराडाइज पेपर्स के मुताबिक भारत से केन्द्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा और बीजेपी से राज्य सभा में सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा का नाम प्रमुख है.

नोटबंदी की सालगिरह पूरे होने में 2 दिन बाकि है लेकिन उससे पहले ही  ब्लैक मनी को लेकर पैराडाइज पेपर्स में एक बड़ा खुलासा हुआ है।

लोकसभा चुनाव 2014 में झारखंड के हजारीबाग से सांसद चुने जाने के बाद जयंत सिन्हा मोदी सरकार में राज्य मंत्री बनाए गए. मोदी सरकार में शामिल होने से पहले जयंत सिन्हा देश में ओमिद्यार नेटवर्क में बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर काम करते थे. इस ओमिद्यार नेटवर्क ने अमेरिकी कंपनी डी लाइट डिजाइन में बड़ा निवेश किया था जबकि इस अमेरिकी कंपनी की टैक्स हैवन केमैन आइलैंड में सब्सिडियरी कंपनी होने की बात सामने आई है.

अंतरराष्ट्रीय लीगल फर्म एप्पलबाई के रिकॉर्ड के मुताबिक जयंत सिन्हा अमेरिकी कंपनी डी लाइट डिजाइन में बतौर डायरेक्टर नियुक्त थे. हालांकि जयंत सिन्हा ने 2014 लोकसभा चुनावों के लिए दिए अपने हलफनामें में इस कंपनी से जुड़े होने के तथ्यों को उजागर नहीं किया था. इसके बाद मोदी सरकार में शामिल होने के बाद भी जयंत ने इसकी जानकारी न तो लोकसभा सचिवालय को दी और न ही प्रधानमंत्री कार्यालय को इसकी सूचना दी जहां 2016 तक वह बतौर राज्य मंत्री नियुक्त थे.

गौरतलब है कि डी लाइट डिजाइन की स्थापना 2006 में कैलिफॉर्निया के सैन फ्रांसिस्को शहर में की गई थी. इसी नाम से कंपनी की एक सब्सिडियरी टैक्स हैवन केमैन आइलैंड में भी स्थित थी. ओमिद्यार नेटवर्क में जयंत सिन्हा सितंबर 2009 में शामिल हुए और दिसंबर 2013 में इससे इस्तीफा दे दिया. ओमिदियार नेटवर्क ने डी लाइट डिजाइन में निवेश किया था जिसने अपने केमैन आइलैंड स्थित सब्सिडियरी से 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज लिया. एप्पलेबी रिकॉर्ड के मुताबिक इस कर्ज के लिए समझौता 31 दिसंबर 2012 को किया गया और इस वक्त जयंत सिन्हा कंपनी के डायरेक्टर पद पर मौजूद थे.

जयंत सिन्हा की सफाई

पैराडाइज पेपर्स के खुलासे पर जयंत सिन्हा ने सफाई देते हुए दावा किया है कि सितंबर 2009 में वह ओमिद्यार नेटवर्क से बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर जुड़े थे. सिन्हा ने माना है कि वह कंपनी के भारत से जुड़े मामलों को देखते थे लेकिन दिसंबर 2013 में उन्होंने इस कंपनी से संबंध खत्म करते हुए अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. सिन्हा ने माना है कि 2010 में ओमिद्यार नेटवर्क का अमेरिकी कंपनी डी लाइट डिजाइन में निवेश की प्रक्रिया को उन्होंने शुरू किया था और उसके बाद नवंबर 2014 तक वह इस अमेरिकी कंपनी के बोर्ड में ओमिद्यार नेटवर्क की तरफ से शामिल रहे. सिन्हा के मुताबिक डी लाइट में वह दिसंबर 2013 तक ओमिद्यार नेटवर्क की तरफ से शामिल रहे जिसके बाद जनवरी 2014 से नवंबर 2014 तक वह डि लाइट के स्वतंत्र निदेशक रहे. सिन्हा ने बाताया कि 2014 में मंत्रीपरिषद में शामिल होने से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया और अब वह किसी तरह से कंपनी के कामकाज से नहीं जुड़े हैं.

बीजेपी सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा पर खुलासा

बिहार से 2014 में रविन्द्र किशोर सिन्हा ने बतौर बीजेपी सदस्य राज्य सभा में शामिल हुए. रविन्द्र किशोर की खास बात है कि मौजूदा संसद में वह सबसे अमीर सदस्य हैं. पूर्व में पत्रकार रहे सिन्हा प्राइवेट सिक्योरिटी सर्विस फर्म एसआईएस (सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज) के प्रमुख हैं. इस सिक्योरिटी फर्म की विदेश में भी रजिस्टर्ड दो कंपनियां मौजूद हैं.

माल्टा रजिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक रविन्द्र सिन्हा की एक कंपनी एसआईएस एशिया पैसिफिक होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड का माल्टा में 2008 में रजिस्ट्रेशन हुआ. यह कंपनी सिन्हा की भारत स्थित कंपनी की सब्सिडियरी कंपनी है. इस विदेशी कंपनी में सिन्हा माइनॉरिटी शेयर होल्डर हैं वहीं उनकी पत्नी इस कंपनी की डायरेक्टर हैं. आंकड़ो के मुताबिक सिन्हा की दूसरी कंपनी एसआईएस इंटरनैशनल होल्डिंग को टैक्स हैवन ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित है और उनकी पहली विदेशी कंपनी के पास इस कंपनी के 3,999,999 शेयर्स मौजूद हैं. जबकि रविन्द्र सिन्हा के पास इस कंपनी का महज एक शेयर मौजूद है.

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