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Published on Jan 5, 15 |     Story by |     Total Views : 25,215 views

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पोक्सो एक्ट और इसमें सजा

गुजरे एक साल में पोक्सो एक्ट में 936 मामले राजस्थान में दर्ज हुए हैं। वहीं महाराष्ट्र में 926 और क्राइम स्टेट कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में 869 मामले ही दर्ज हुए हैं। वहीं केरल में 536 मामले पोक्सो एक्ट में लिए गए हैं। वहीं हरियाणा में सिर्फ 46 और पंजाब में सिर्फ 29 मामले पोक्सो एक्ट में लिए गए हैं।


p13कानूनी जानकार और हाई कोर्ट की एडवोकेट रेखा अग्रवाल बताती हैं कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का सेक्सुअल बर्ताव इस प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पोक्सो) कानून के दायरे में आता है। इसके तहत लडक़े और लडक़ी,दोनों को ही प्रोटेक्ट किया गया है। इस तरह के मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है और बच्चों के साथ होने वाले अपराध के लिए उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इस एक्ट के तहत बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से प्रोटेक्ट किया गया है। 2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई।

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट डी.बी. गोस्वामी के मुताबिक पोक्सो कानून की धारा-3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को परिभाषित किया गया है। अगर कोई किसी बच्चे के शरीर के किसी भी हिस्से में प्राइवेट पार्ट डालता है, बच्चे के प्राइवेट पार्ट में कोई चीज या प्राइवेट पार्ट डालता है या बच्चे से ऐसा करने को कहता तो यह सेक्शन-3 के तहत अपराध होगा। इसके लिए धारा-4 में सजा तय की गई है। दोषी पाए जाने पर मुजरिम को 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा तय की गई है।

कोई पुलिस कर्मी, टीचर, हॉस्पिटल स्टाफ या फिर कोई ऐसा, जिसकी हिफाजत में बच्चा हो , अगर वह बच्चे के साथ पेनेट्रेटव सेक्सुअल असॉल्ट करता है, दो या ज्यादा लोग मिलकर ऐसी हरकत करते हैं, हथियार के बल पर ऐसा किया जाता हो तो ऐसे मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद मुजरिम को धारा-6 के तहत 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। वहीं धारा-7 के तहत सेक्सुअल असॉल्ट को परिभाषित किया गया है। अगर कोई शख्स किसी बच्चे के प्राइवेट पार्ट को टच करता है या अपने प्राइवेट पार्ट को बच्चे से टच कराता है तो धारा-8 के तहत 3 साल से लेकर 5 साल तक कैद हो सकती है। बच्चों के साथ सेक्सुअल हैरेसमेंट को धारा-11 में परिभाषित किया गया है। अगर कोई गलत नियत से बच्चों के सामने सेक्सुअल हरकतें करता है, या उसे ऐसा करने को कहता है, पोर्नोग्राफी दिखाता है तो 3 साल तक कैद की सजा हो सकती है। कानूनी जानकार अजय दिग्पाल बताते हैं कि अगर कोई बच्चों का इस्तेमाल पोर्नोग्राफी के लिए कहता है तो यह भी गंभीर अपराध है। ऐसे मामले में उम्रकैद हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट डी.बी. गोस्वामी के मुताबिक पोक्सो कानून की धारा-3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को परिभाषित किया गया है। अगर कोई किसी बच्चे के शरीर के किसी भी हिस्से में प्राइवेट पार्ट डालता है, बच्चे के प्राइवेट पार्ट में कोई चीज या प्राइवेट पार्ट डालता है या बच्चे से ऐसा करने को कहता तो यह सेक्शन-3 के तहत अपराध होगा। इसके लिए धारा-4 में सजा तय की गई है। दोषी पाए जाने पर मुजरिम को 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा तय की गई है।

पोक्सो एक्ट और इसमें सजा

गुजरे एक साल में पोक्सो एक्ट में 936 मामले राजस्थान में दर्ज हुए हैं। वहीं महाराष्ट्र में 926 और क्राइम स्टेट कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में 869 मामले ही दर्ज हुए हैं। वहीं केरल में 536 मामले पोक्सो एक्ट में लिए गए हैं। वहीं हरियाणा में सिर्फ 46 और पंजाब में सिर्फ 29 मामले पोक्सो एक्ट में लिए गए हैं। कानूनी जानकार और हाई कोर्ट की एडवोकेट रेखा अग्रवाल बताती हैं कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का सेक्सुअल बर्ताव इस प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पोक्सो) कानून के दायरे में आता है। इसके तहत लडक़े और लडक़ी,दोनों को ही प्रोटेक्ट किया गया है। इस तरह के मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है और बच्चों के साथ होने वाले अपराध के लिए उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इस एक्ट के तहत बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से प्रोटेक्ट किया गया है। 2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई।

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट डी.बी. गोस्वामी के मुताबिक पोक्सो कानून की धारा-3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को परिभाषित किया गया है। अगर कोई किसी बच्चे के शरीर के किसी भी हिस्से में प्राइवेट पार्ट डालता है, बच्चे के प्राइवेट पार्ट में कोई चीज या प्राइवेट पार्ट डालता है या बच्चे से ऐसा करने को कहता तो यह सेक्शन-3 के तहत अपराध होगा। इसके लिए धारा-4 में सजा तय की गई है। दोषी पाए जाने पर मुजरिम को 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा तय की गई है।

कोई पुलिस कर्मी, टीचर, हॉस्पिटल स्टाफ या फिर कोई ऐसा, जिसकी हिफाजत में बच्चा हो , अगर वह बच्चे के साथ पेनेट्रेटव सेक्सुअल असॉल्ट करता है, दो या ज्यादा लोग मिलकर ऐसी हरकत करते हैं, हथियार के बल पर ऐसा किया जाता हो तो ऐसे मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद मुजरिम को धारा-6 के तहत 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। वहीं धारा-7 के तहत सेक्सुअल असॉल्ट को परिभाषित किया गया है। अगर कोई शख्स किसी बच्चे के प्राइवेट पार्ट को टच करता है या अपने प्राइवेट पार्ट को बच्चे से टच कराता है तो धारा-8 के तहत 3 साल से लेकर 5 साल तक कैद हो सकती है। बच्चों के साथ सेक्सुअल हैरेसमेंट को धारा-11 में परिभाषित किया गया है। अगर कोई गलत नियत से बच्चों के सामने सेक्सुअल हरकतें करता है, या उसे ऐसा करने को कहता है, पोर्नोग्राफी दिखाता है तो 3 साल तक कैद की सजा हो सकती है। कानूनी जानकार अजय दिग्पाल बताते हैं कि अगर कोई बच्चों का इस्तेमाल पोर्नोग्राफी के लिए कहता है तो यह भी गंभीर अपराध है। ऐसे मामले में उम्रकैद हो सकती है।

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3 Responses to पोक्सो एक्ट और इसमें सजा

  1. Bhaskar rao says:

    क्या मुझे इस बारे में यह जानकारी मिल सकती है।कि देशभर में इस कानून के बनने के बाद से इस केस में कितने लोगो पर ये आरोप लगे है,दूसरा और कितने आरोप झूठे लगे है।मतलब आरोपी निर्दोष साबित हुए है।।।कृपया मेल करे।धन्यवाद

  2. Uma says:

    Many details in child abuse

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