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Published on Jul 28, 17 |     Story by |     Total Views :

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थलसेना, नौसेना और वायुसेना को वित्तीय ताकत

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि देश के संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने थलसेना, नौसेना और वायुसेना को ‘पर्याप्त’ वित्तीय ताकत दी है. मंत्रालय ने कहा कि संवेदनशील रक्षा संपत्तियों की पूर्ण सुरक्षा का काम प्राथमिकता एवं समयबद्ध तरीके से किया जाना सुनिश्चित करने के लिए रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कड़ी समयसीमा तय की है. तीनों सेवाओं के उप प्रमुखों को आदेश देने, उपकरण खरीदने के अधिकार दिए गए हैं. इसके लिए उन्हें रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है.
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने संवेदनशील सैन्य ठिकानों के परिसरों की सुरक्षा के काम को अंजाम देने के लिए सैन्य बलों को पर्याप्त वित्तीय ताकत देने का फैसला किया है. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस फैसले के बाद तीनों उप प्रमुख संवेदनशील सैन्य अड्डों पर परिसर की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कम से कम 800 करोड़ रुपये वार्षिक तौर पर खर्च कर सकेंगे. पिछले साल पठानकोट वायुसैन्य अड्डे पर हमले के बाद बलों द्वारा चिन्हित कुल 3000 संवेदनशील अड्डों में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के 600 अति संवेदनशील ठिकाने शामिल हैं.

भारतीय सेना में साजो-सामान की कमी है, इसको पूरी तरह से कमी के रूप में नहीं देखा जा सकता. हालांकि, कमी तो है, लेकिन इसके कुछ अलहदा पहलू हैं. एक तो यह कि सेना के पास पंद्रह दिन या तीस दिन तक के लिए रिजर्व साजो-सामान और हथियार होते हैं, ताकि किसी देश के साथ लड़ाई की स्थिति में इनका फौरन इस्तेमाल हो सके. दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी देश से लड़ाई की स्थिति क्या है, इसके विस्तार को समझना होगा. मसलन, पाकिस्तान और चीन से सीमा पर रोजाना चलनेवाली छिटपुट लड़ाईयां अलग-अलग खर्च की मांग करती हैं. छोटी लड़ाई है, तो हथियार काफी हैं, लेकिन लड़ाई बड़ी है, तो हो सकता है कि हथियार कम पड़ जायें. उसी तरह से, अगर पाकिस्तान से आमने-सामने लड़ाई होगी, तो उसके लिए हमारे पास पर्याप्त हथियार और साजो-सामान हैं. लेकिन वहीं, अगर चीन से युद्ध होता है, तो हमारे पास हथियार और साजो-सामान की कमी हो सकती है. यह सब पूरा का पूरा और गंभीर काम सरकार का है कि वह इसकी गंभीरता को समझे और हर कमी को पूरा करे, ताकि सेना का मोराल ऊंचा बना रहे. विडंबना यह है कि सरकार और उसके मंत्री इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, और रक्षा संबंधी उन्हें कोई जानकारी भी नहीं है. सरकार को हमेशा इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि सेना को कभी किसी चीज की कमी न हो, क्योंकि यह सिर्फ सेना की बात नहीं है, बल्कि देश की बात है.
 

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