All Rights

Published on Aug 14, 16 |     Story by |     Total Views : 538 views

Pin It

Home » Editorial, Magazine Issues » जीएसटी की राह में चुनौतियां और भी हैं

जीएसटी की राह में चुनौतियां और भी हैं

संविधान संशोधन बिल के कानून बनने के बाद सरकार को जीएसटी बिल लाना होगा। जिसमें जीएसटी की बारीकियां शामिल होंगी। इस बिल को तैयार करने में भी खास तौर से राज्यों के स्तर पर राजनैतिक सहमति बनाना काफी मुश्किल होगा। क्योंकि कई मुद्दे ऐसे हैं जिस पर राज्यों के साथ मतभेद लंबे समय से बने हुए हैं।

AUGUST-2016गुजरात में आज जीएसटी बिल पास हो गया। गुजरात जीएसटी पास करने वाला देश का छठां राज्य बन गया है। आज विधानसभा ने सर्वसम्मति से इसे पास कर दिया। लोकसभा और राज्यसभा में जीएसटी बिल पारित हो जाने के बाद जीएसटी को लागू करने के लिए करीब 15 राज्यों की स्वीकारिता चाहिए। इसलिए भाजपा शासित राज्यों को अगस्त तक हर हाल में जीएसटी विधेयक पास कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। बता दें कि गुजरात से पहले छत्तीसगढ़, हिमांचल प्रदेश, झारखंड, बिहार और असम में जीएसटी पास हो चुका है। वहीं गुजरात सरकार जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में जुटी है ताकि इसे अगले साल अप्रैल से लागू किया जा सके। गुजरात के पूर्व वित्तमंत्री सौरभ पटेल ने कहा कि जीएसटी के लिए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने के लिए एक कंपनी भी बना दी गई है। उन्होंने दावा किया कामकाज जनवरी तक पूरा हो पाएगा।

जीएसटी संविधान संशोधन बिल अब 6 राज्यों से पास हो चुका है लेकिन अभी चुनौतियां बाकी हैं। दरअसल इस बिल को आधे से ज्यादा राज्यों की विधानसभाओं की सहमति मिलना जरूरी है। इतना ही नहीं जीएसटी बिल के प्रारूप पर अभी काफी खींचतान भी बाकी है। संसद से बिल पारित हो जाने भर से जीएसटी लागू नहीं होगा। अभी इसे दो परीक्षाओं से गुजरना है। पहली है राजनीतिक परीक्षा जिसके तहत संसद से पारित संविधान संशोधन बिल को आधे से ज्यादा राज्यों की विधानसभा से मंजूरी लेनी होगी।

हालांकि इसमें कोई बड़ी अड़चन नहीं आने वाली है क्योंकि मौजूदा स्थिति ये है कि कांग्रेस अकेले सिर्फ 6 राज्यों में शासन कर रही है। जबकि 2 राज्य में वो गठबधंन का हिस्सा है। वहीं भाजपा 8 राज्यों में अकेले और 6 में गठबंधन के साथ शासन में है। बाकी 9 राज्यों में दूसरी पार्टियां सत्ता में हैं। इनमें भी ओडिशा,पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य जीएसटी के पक्ष में हैं। यानी 16 राज्यों का समर्थन आसानी से मिल जाएगा और संविधान संशोधन कानून बन जाएगा।

संविधान संशोधन बिल के कानून बनने के बाद सरकार को जीएसटी बिल लाना होगा। जिसमें जीएसटी की बारीकियां शामिल होंगी। इस बिल को तैयार करने में भी खास तौर से राज्यों के स्तर पर राजनैतिक सहमति बनाना काफी मुश्किल होगा। क्योंकि कई मुद्दे ऐसे हैं जिस पर राज्यों के साथ मतभेद लंबे समय से बने हुए हैं। मसलन, जीएसटी के दायरे में कितने टर्नओवर तक के कारोबारियों का लाना है। जीएसटी ड्राफ्ट लॉ का प्रस्ताव है कि 9 लाख रु से ज्यादा के सालाना टर्नओवर वालों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। लेकिन जानकार इसे खतरनाक मान रहे हैं।

अब मुद्दा है कि छोटे कारोबारियों पर किसका अधिकार होगा, केंद्र का टैक्स प्रशासन, राज्य टैक्स प्रशासन या फिर दोनों। इन सबसे बड़ा मुद्दा है कि किस सामान पर कितना टैक्स लगाया जाए। इसे लेकर राज्यों के अपने अपने हित तो हैं ही लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है कि कैसे टैक्स का रेट तय किया जाए कि महंगाई भी ना बढ़े और सरकारी खजाने को नुकसान भी ना हो। ऐसे कई संवेदनशील मुद्दों पर बहस तो ठीक से शुरू भी नहीं हुई है।

टैक्स एक्सपर्ट सत्या पोद्दार के मुताबिक जीएसटी के तहत काफी चीजें आगे चलकर तय करनी होगी। कौन से आइटम पर कैसे टैक्स लगेगा ये तय करना होगा। टैक्स लगाने का आधार क्या है ये तय करना होगा। जीएसटी के तहत टैक्स की दरें और प्रक्रिया को लेकर काफी राजनैतिक चर्चा होगी। जबकि अभी तक टैक्स की दरों और प्रक्रिया पर राजनैतिक चर्चा शुरू भी नहीं हुई है।

इसके अलावा जीएसटी की राह में चुनौतियां और भी हैं। लेकिन अभी इतना समझ लीजिए कि जीएसटी को मंजिल तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है।

 

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to top