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Published on Dec 11, 16 |     Story by |     Total Views : 273 views

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काला धन की अस्पष्ट परिभाषा

आज हर कोई सरकार की इसके लिए सराहना कर रहा है. तीस सितम्बर की समय सीमा खत्म होने के बाद देश को काला धन धारकों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का इंतजार था, लेकिन ये तो सरकार ने काले धन पर सर्जिकलस्ट्राइक करने जैसा कदम उठा लिया. वो भी बिना किसी शोरगुल और हो-हंगामे के अचानक ही इतना बड़ा ऐलान हो गया, जिससे कि काला धन धारकों को अपने पैसे को ठिकाने लगाने के लिए सोचने को भी वक्त नहीं मिल पाया होगा.


ALL-RIGHTS-NOV-DEC-2016साल पहले गुजरात से आने वाले मोरार जी देसाई ने भी यह 1000, 5000 और 10,000 के नोट को बैन करने का फैसला लिया था। उस समय आरबीआई गवर्नर आईजी पटेल थे।अब इसे इत्तेफाक कहा जाएगा की इस बार भी गुजरात से जुड़े नरेंद्र मोदी ने यह कदम उठाया है. लेकिन ये पहला मौक़ा नहीं है जब बड़े नोट बंद किए गए हैं। 1946 में में भी हज़ार रुपए और 10 हज़ार रुपए के नोट वापस लिए गए थे। फिर 1954 में हज़ार, पांच हज़ार और दस हज़ार रुपए के नोट वापस लाए गए। उसके बाद जनवरी 1978 में इन्हें फिर बंद कर दिया गया। 30 सितम्बर, 2016 की तारीख इतिहास में दर्ज हो चुकी है. इसी रोज भारतीय सेना के डीजीएमओ द्वारा प्रेस वार्ता करके यह सूचना दी गई कि सेना ने पाक के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में जाके आतंकी कैम्पों पर सर्जिकलस्ट्राइक की गई है. देश सेना के इस सर्जिकलस्ट्राइक पर गर्वित हुआ, मगर तब उसे अंदाजा नहीं था कि इस तारीख के बाद ही एक और बहुत बड़ी सर्जिकलस्ट्राइक की पटकथा तैयार हो रही थी. काला धन धारकों पर सर्जिकलस्ट्राइक की भूमिका बन चुकी थी.
8 नवम्बर की शाम अचानक यह खबर आई कि प्रधानमंत्री देश के नाम संबोधन करेंगे. थोड़ा अजीब लगा कि अचानक देश के नाम संबोधन! क्या मामला है ? आखिर संबोधन शुरू हुआ और थोड़ी ही देर में देश में हर्ष-उत्साह और उथल-पुथल का माहौल बन गया. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पांच सौ और एक हजार के नोट आधी रात से बंद होने का ऐलान कर दिया था. सोशल मीडिया से लेकर चाय की नुक्कड़ों, राशन की दुकानों और घर के बेड रूम-किचन तक के लिए ये चर्चा का विषय बन गया.
आज हर कोई सरकार की इसके लिए सराहना कर रहा है. तीस सितम्बर की समय सीमा खत्म होने के बाद देश को काला धन धारकों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का इंतजार था, लेकिन ये तो सरकार ने काले धन पर सर्जिकलस्ट्राइक करने जैसा कदम उठा लिया. वो भी बिना किसी शोरगुल और हो-हंगामे के अचानक ही इतना बड़ा ऐलान हो गया, जिससे कि काला धन धारकों को अपने पैसे को ठिकाने लगाने के लिए सोचने को भी वक्त नहीं मिल पाया होगा. अब जिन्होनें भी गलत तरीकों से धनार्जन किया होगा और सरकारी निगाह में आने से बचने के लिए उसे यत्र-तत्र छिपाया होगा, उनकी शामत आई समझिये.
अब होगा ये कि काला धन धारक यदि अपना पैसा लेकर घर में बैठे रहते हैं तो वो कागज का पुर्जा भर है. और यदि उसे बैंक में बदलवाने जाएंगे तो बैंक सबसे पहले उस पैसे का स्रोत पूछेगा. काला धन धारक यहीं घिर जाएंगे. जिसपर उसपे टैक्स अलग लगेगा. और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि बैंक में एक दिन में आप पचास हजार तक ही जमा कर सकते हैं, उससे अधिक जमा करने पर आपके पैन कार्ड संख्या के जरिए आपकी कर अदायगी की पूरी जन्म कुंडली बैंक निकाल लेगा.
बस काला धन धारकों के कारनामों की कलई तार-तार हो जाएगी. इसके बाद तो इनकम टैक्स विभाग से लेकर पुलिस तक बाकी सब चीजें खोद-खोद कर निकालने के लिए बैठी ही है. समझा जा सकता है कि सरकार के इस निर्णय के बाद काले धन के स्वामियों पर कितना भीषण वज्रपात हुआ है. बिना किसी छापेमारी और धरपकड़ के सिर्फ एक निर्णय से सरकार ने देश के भीतर मौजूद काले धन को लगभग-लगभग समाप्त करने जैसा काम कर दिया है.मेहनत और ईमानदारी से पैसा कमाने वाले सामान्य लोगों को इस निर्णय से दो असुविधा हो रही है.इस तरह के फैसले की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि भारत जैसे देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र का है। असंगठित क्षेत्र के कर्मियों के पास बैंक खाता नहीं होते। या बैंक खाते का वे इस्तेमाल नहीं करते। असली चिंता है कि वो क्या करेंगे। उनके लिए ये एक बड़ा झटका है। अगर पैसे जितने भी हों लेकिन उसका हिसाब किताब हो, तब कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत वहां है जहां आपके पास पैसे का हिसाब नहीं हैं। इसीलिए माना जा रहा है कि असल तस्वीर तो अगले कुछ दिनों में साफ होगी। लोगों को डर है कि वो बाज़ार में जाते हैं और उनके पास पांच सौ या हज़ार रूपए का नोट ही है तो वो कैसे सामान ले पाएंगे।

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